
इस्लामाबाद, 19 जुलाई . Pakistan में जल बंटवारे को दो प्रांतों के बीच विवाद गहराता जा रहा है. सिंध और बलूचिस्तान आमने-सामने आ गए हैं. बलूचिस्तान Government के तीन मंत्रियों ने सुक्कुर बैराज पर किसानों के प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए सिंध पर बलूचिस्तान के हिस्से का पानी अवैध रूप से मोड़ने का आरोप लगाया. मंत्रियों ने कहा कि लगातार पानी की कमी के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बलूचिस्तान के मंत्रियों ने सिंध Government से मांग की कि वह राज्य के भीतर बने कथित अवैध जल मार्गों के जरिए बलूचिस्तान के हिस्से का पानी चोरी किए जाने पर तत्काल कार्रवाई करे. Saturday को लरकाना डिवीजन के कई इलाकों के किसानों ने बलूचिस्तान के किसानों के साथ मिलकर पानी की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.
इस मुद्दे को लेकर बलूचिस्तान के Chief Minister सरफराज बुगती ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. इस समिति में मंत्री मुहम्मद सादिक उमरानी, सलीम अहमद खोसो और मुहम्मद खान लेहरी शामिल हैं. समिति का उद्देश्य सिंध Government के समक्ष बलूचिस्तान की जल संबंधी चिंताओं को उठाना है.
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मंत्री मुहम्मद सादिक उमरानी ने कहा कि बलूचिस्तान केवल 1991 के जल समझौते के तहत अपना वैध हिस्सा चाहता है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रांत को खिरथर नहर से मिलने वाले 2,400 क्यूसेक और पट फीडर से मिलने वाले 6,700 क्यूसेक पानी का पूरा हिस्सा नहीं मिल रहा है.
उमरानी ने कहा कि पानी की कमी के कारण किसान फसल बुवाई के महत्वपूर्ण समय में सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
वहीं, मंत्री सलीम अहमद खोसो ने कहा कि सिंध सिंचाई विभाग का दावा है कि बलूचिस्तान को उसके हिस्से से अधिक पानी मिल रहा है, लेकिन समिति ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है और पानी की गंभीर कमी साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की, ताकि हर साल किसानों को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन न करना पड़े.
इस वर्ष की शुरुआत में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी चेतावनी दी गई थी कि बलूचिस्तान गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. इसके साथ ही तेजी से बढ़ती आबादी प्रांत के पहले से कमजोर पर्यावरणीय संतुलन पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है.
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, क्वेटा में हर सुबह हजारों परिवार इस चिंता के साथ दिन की शुरुआत करते हैं कि आज पानी आएगा या नहीं. सूखे नलों की आवाज वहां के लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. कई परिवारों को यह तय करना पड़ता है कि सीमित पानी का इस्तेमाल खाना बनाने में करें या बच्चों की जरूरतों के लिए!
रिपोर्ट के अनुसार, जो समस्या कभी मौसमी मानी जाती थी, वह अब बलूचिस्तान के लोगों के जीवन की स्थायी चुनौती बन गई है. इस संकट के साथ-साथ तेजी से बढ़ती आबादी भी स्थिति को और गंभीर बना रही है.
पॉपुलेशन मैनेजमेंट एंड कम्युनिकेशन टीम (पीएमसीटी) के निदेशक अब्दुल सत्तार शाहवानी के अनुसार, बलूचिस्तान की आबादी 2017 के 1.23 करोड़ से बढ़कर अब 1.49 करोड़ हो गई है. यह औसतन 3.2 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है. सरकारी अनुमानों के मुताबिक 2030 तक प्रांत की आबादी 1.85 करोड़ और 2050 तक 3.5 करोड़ से अधिक हो सकती है.
रिपोर्ट में एक शहरी नियोजन विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि यदि आबादी लगातार बढ़ती रही और भूजल स्तर इसी तरह घटता रहा, तो भविष्य में हालात असंभव जैसे हो जाएंगे.
विश्व बैंक के अनुसार, बलूचिस्तान की 95 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भर है, जबकि केवल 5 प्रतिशत क्षेत्र ही सिंधु नदी बेसिन की नहर प्रणाली से जुड़ा हुआ है. भूजल पर अत्यधिक निर्भरता अब प्रांत के लिए जीवनरेखा के बजाय गंभीर संकट का कारण बनती जा रही है.
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केआर/
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