
वाराणसी, 8 जून . काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बिरला छात्रावास की मूल स्थापत्य शैली और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की मांग को लेकर छात्रों ने तीखा विरोध प्रदर्शित किया है. छात्रों ने कुलपति और कुलसचिव को ज्ञापन सौंपकर छात्रावास परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और संरचनात्मक परिवर्तनों पर गहरी चिंता जताई तथा तत्काल हस्तक्षेप की मांग की.
छात्रों का कहना है कि बिरला छात्रावास केवल छात्रों के आवास का स्थान नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा, समृद्ध इतिहास और विशिष्ट वास्तुकला का जीवंत प्रतीक है. दशकों से यह छात्रावास अपनी पारंपरिक स्थापत्य शैली, विशाल खुले परिसर, हरित वातावरण और सांस्कृतिक पहचान के कारण विश्वविद्यालय समुदाय में विशेष स्थान रखता आया है. बीएचयू की ऐतिहासिक धरोहरों में इसकी अलग पहचान रही है, जिसे सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है.
छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक इमारतों और परिसरों का संरक्षण प्रशासन की केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति नैतिक दायित्व भी है. उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि बिरला छात्रावास की मूल वास्तुकला और पारंपरिक स्वरूप को यथावत बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
छात्र अभय सिंह ने से बात करते हुए कहा, “बिरला छात्रावास के चारों तरफ दीवार खड़ी करके उसके मूल स्वरूप को खत्म करने की तैयारी की जा रही है. जैसे जेल की दीवारें होती हैं, वैसा बनाकर प्रशासन हमें रखना चाहता है, जो हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे.”
छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर निर्माण कार्य तुरंत नहीं रोका गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा. बिरला छात्रावास में रहने वाले अन्य छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करने पर तुला हुआ है. उन्होंने बताया कि इससे पहले रुईया छात्रावास को तोड़कर ऊंचा किया गया था, जिसके बाद उसकी सुंदरता पूरी तरह समाप्त हो गई.
छात्रों का कहना है कि वर्तमान में 3 फीट ऊंची दीवार है, अब प्रशासन इसे 9 फीट ऊंचा करने की तैयारी कर रहा है, जिससे छात्रों को कैदियों की तरह चार दीवारों में बंद कर दिया जाएगा. छात्रों ने आगे कहा कि बाउंड्री वॉल तोड़कर और ऊंचा करने से छात्रावास का भव्य और खुला स्वरूप खतरे में पड़ जाएगा.
उन्होंने कहा कि बिरला छात्रावास विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और विशिष्ट स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण प्रतीक है. यह केवल आवासीय परिसर नहीं, बल्कि बीएचयू की संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न अंग है. इसके साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं है.
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एबीएम
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