
New Delhi, 31 जुलाई . कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से भारतीय हॉकी टीम की भगवा जर्सी और आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को लेकर की गई टिप्पणियों पर देशभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कई नेताओं, शिक्षाविदों और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने उनके बयानों पर आपत्ति जताई है, जबकि Samajwadi Party ने हॉकी टीम की जर्सी के रंग बदलने को लेकर Government पर वैचारिक एजेंडा लागू करने का आरोप लगाया है.
साध्वी प्रज्ञा भारती ने प्रियंका गांधी के भगवा रंग पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हॉकी टीम, फुटबॉल टीम, बास्केटबॉल टीम या क्रिकेट टीम किस रंग की जर्सी पहनती है, यह उनकी व्यक्तिगत पसंद का विषय है. भगवा त्याग, तपस्या और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर प्रियंका गांधी को भगवा रंग से इतनी आपत्ति क्यों है. चुनाव के समय कांग्रेस नेता मंदिरों में जाते हैं और भगवा शॉल ओढ़ते दिखाई देते हैं, इसलिए उन्हें इस हिपोक्रेसी से बाहर निकलना चाहिए. भगवा से विरोध करना बंद करना चाहिए क्योंकि पूरा देश और दुनिया इसे देख रही है.
इसी मुद्दे पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि खेलों का Politicalरण नहीं किया जाना चाहिए. कांग्रेस बार-बार भगवा रंग को विवादों में घसीटने का प्रयास करती है, जबकि भगवा India की संस्कृति, इतिहास, स्वाभिमान और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है. तिरंगे का सर्वोच्च रंग भी भगवा ही है और कांग्रेस को रंगों, संस्कृति और खेलों को राजनीति से दूर रखना चाहिए. कांग्रेस पहले भी भगवा को बदनाम करने की कोशिश करती रही है, लेकिन हर बार उसे असफलता मिली है.
वहीं, Samajwadi Party के सांसद रामजी लाल सुमन ने हॉकी टीम की जर्सी के रंग परिवर्तन को लेकर अलग रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि देशभर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा, पहनावा और संस्कृति को लागू करने की कोशिश की जा रही है और हॉकी टीम की जर्सी बदलना उसी प्रक्रिया का हिस्सा है.
दूसरी ओर, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामाकोटी पर प्रियंका गांधी की टिप्पणी को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है. जम्मू स्थित क्लस्टर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर केएस चंद्रशेखर ने इस मुद्दे पर एक खुला पत्र जारी किया है, जिसे अब तक 215 से अधिक शिक्षाविदों का समर्थन मिल चुका है. उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना करना गलत नहीं है, लेकिन किसी व्यक्ति की योग्यता और योगदान पर टिप्पणी करने से पहले उसके कार्यों और उपलब्धियों को समझना आवश्यक है. प्रो. कामाकोटी का India के लिए योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनकी प्रतिष्ठा पर बिना तथ्यों के सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए. सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है.
Madhya Pradesh के रीवा में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रोफेसर शुभा तिवारी ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अर्थ है कि किसी भी विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों को सुना जाए. उन्होंने कहा कि आज भी कई दवाइयां पशु-आधारित उत्पादों से बनाई जाती हैं और यदि किसी को प्रो. कामाकोटी की बातों से असहमति है तो वह तर्कों के साथ अपनी बात रख सकता है. प्रो. कामाकोटी ने चार दशकों तक शिक्षा, अनुसंधान और कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. ‘शक्ति’ माइक्रोप्रोसेसर जैसे प्रोजेक्ट के माध्यम से India को वैश्विक पहचान दिलाई है. ऐसे वैज्ञानिक का उपहास करना उचित नहीं है. उन्होंने 215 शिक्षाविदों द्वारा जारी खुले पत्र का भी समर्थन किया और संसद में गरिमापूर्ण भाषा के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया.
Gujarat के सूरत स्थित वीर नर्मद दक्षिण Gujarat विश्वविद्यालय (वीएनएसजीयू) के कुलपति डॉ. किशोरसिंह एन. चावड़ा ने कहा कि जब भी किसी वैज्ञानिक या पद्म पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति पर Political टिप्पणी की जाएगी, देशभर का कुलपति समुदाय उसका जवाब देगा. उन्होंने वैज्ञानिकों को देश की अमूल्य संपत्ति बताते हुए कहा कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए. किसी भी शोध या वैज्ञानिक विचार पर बहस तथ्यों और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों के माध्यम से, क्योंकि इससे वैज्ञानिक समुदाय का मनोबल प्रभावित होता है.
Lucknow में Samajwadi Party के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के शिक्षाविदों और अकादमिक जगत से जुड़े लोगों को Political विवादों से दूर रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि विपक्ष को Government को नीतिगत मुद्दों पर घेरना चाहिए, लेकिन शिक्षाविदों और कुलपतियों को निशाना बनाने से बचना चाहिए.
वहीं, उत्तर प्रदेश Government में राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने प्रियंका गांधी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि गांधी परिवार से भारतीय परंपराओं और संस्कृति के अनुरूप व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जा सकती. यदि किसी वैज्ञानिक को ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहा जाएगा तो फिर Political स्तर पर भी इसी तरह की प्रतिक्रियाएं आएंगी, लेकिन नेताओं को एक-दूसरे के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करने से बचना चाहिए.
आईआईएम कलकत्ता के निदेशक आलोक राय ने प्रो. कामाकोटी का समर्थन करते हुए कहा कि वह India में कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्ती हैं और उनके नेतृत्व में आईआईटी मद्रास ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. भारतीय परंपरा में गाय से जुड़े कई उत्पादों का उपयोग लंबे समय से होता आया है और गोमूत्र के औषधीय गुणों पर भी विभिन्न स्तरों पर अध्ययन किए गए हैं. त्वचा संबंधी समस्याओं, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन और वजन नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में इसके उपयोग पर शोध उपलब्ध हैं.
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