
Mumbai , 11 जून . मध्य पूर्व एशिया में बढ़ते टकराव के बीच Wednesday को जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर हुए हमले में तीन भारतीयों की मौत हो गई है. वहीं, Thursday को एक और पोत एमटी जलवीर पर हमले की खबर है. तीन दिन में ऐसे तीन जहाज रहे जिन पर हमला हुआ और तीनों में भारतीय नाविकों की संख्या अच्छी खासी थी. India लगातार इन हमलों की निंदा करता रहा है. इस बीच नाविकों के अधिकारों की बात करने वाले संगठन फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) के महासचिव मनोज यादव ने नाविक सुरक्षा और वर्तमान हालात को लेकर से बात की.
मनोज यादव ने बताया, “पिछले तीन दिन से ये बात चल रही थी. सबसे पहले एमटी मैरिवेक्स पर हमला हुआ. उसके सभी 24 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था. इसके बाद Wednesday को हमें पता चला कि 24 भारतीय नाविकों वाले सेट्टाबेलो पर हमला हुआ. जहाज पर कुल 28 क्रू सदस्य थे, जिनमें 24 भारतीय, 2 Pakistanी, 1 रूसी, और 1 यूक्रेनी नागरिक शामिल बताए गए हैं.”
एफएसयूआई महासचिव के अनुसार, हमले के बाद जहाज के भीतर संचार व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई, जिससे बचाव दलों को सटीक जानकारी जुटाने में कठिनाई हो रही है. जहाज में मौजूद लोगों से किसी तरह संपर्क साधा गया. तो संबंधित पक्षों से मिली जानकारी के अनुसार, जहाज पर हमला कथित रूप से मिसाइल से किया गया, जिससे इंजन रूम को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा. Wednesday शाम को कंपनी ने हमें बताया कि दो की मौत हो चुकी है जबकि चीफ इंजीनियर लापता बताए गए.
यादव के मुताबिक, यह बहुत दुखद और गंभीर मुद्दा है. उन्होंने कहा, “तीन दिन में हमारे 48 क्रू की सांस आफत में रही. यूएस नाकेबंदी का नाम दे रहा है, प्रतिबंध की बात की जा रही है. लेकिन आखिर कमर्शियल जहाजों पर कोई फायर क्यों कर रहा है? इन जहाजों में हथियार नहीं होते. कमर्शियल वेसल्स पर हमला नहीं किया जाना चाहिए था.”
एआईएस, यानी जहाज की पहचान जाहिर करने वाला और फिर उससे संपर्क साधने में मदद करने वाला सिस्टम, ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) बंद कर दिया जाता है. आखिर क्यों, इसकी वजह यादव ने बताई. उन्होंने कहा, “जहाज का एआईएस बंद कर दिया जाता है. एआईएस सिस्टम को कई जहाज में बंद कर रखा है ताकि उनके जहाज को कोई ट्रेस न करे और अटैक कर दे. ये लोग अपनी सुरक्षा की वजह से अपनी पहचान छुपा रहे हैं जिससे आईआरजीसी या अमेरिका से बचे रहें. कइयों पर पहले हमला हो चुका है. सब खुद को बचा रहे हैं.”
उनके मुताबिक एमटी सेट्टाबेलो में यूएस की तरफ से वन-वे संपर्क साधा गया. उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “क्या यूएस की जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि वो स्पीडबोट या चॉपर से वहां पहुंचे और प्रत्यक्ष रूप से निगरानी करते?”
इस हादसे में मारे गए तीन लोगों की पहचान जाहिर हो चुकी है. हादसे में Himachal Pradesh के डेक कैडेट आदित्य शर्मा, दूसरे उत्तर प्रदेश के देवरिया से शिवानंद चौरसिया (इंजन फिटर) और तीसरे आंध्र प्रदेश के रहने वाले और जहाज के चीफ इंजीनियर Patnaला सुरेश थे.
रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना के समय जहाज के स्थान को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं. कुछ का कहना है कि जहाज ओमान के तट के पास स्थिर था, जबकि दूसरे पक्ष का दावा है कि वह ईरान की ओर बढ़ रहा था. इसी विरोधाभास के चलते घटना की परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं. मनोज यादव ने कहा, “जितना हमें पता है जहाज खड़ा था अभी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकते.”
एफएसयूआई, ओमान स्थित भारतीय दूतावास के लगातार संपर्क में है और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटा रहा है.
मनोज यादव ने कहा, “खाड़ी क्षेत्र में अभी भी India के 18,000 नाविक मौजूद हैं. पिछले तीन दिनों में जो हुआ है उससे उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. निश्चित तौर पर ये डर पैदा करता है. अब जो हुआ है, हो सकता है अमेरिका को जवाब देने के लिए ईरान की ओर से कोई कार्रवाई हो और फिर बेगुनाह इसका निशाना बनें.”
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केआर/
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