किसानों को डेटा विज्ञान व तकनीकी से जोड़े – डाॅ. सिंह

उदयपुर (Udaipur). महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur) के तत्वावधान में एक दिवसीय वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति, डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़ ने की तथा कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डाॅ. आनंद कुमार सिंह, उप महानिदेशक, उद्यान विज्ञान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली (New Delhi) थे. डॉ. सिंह ने कृषि में वर्तमान प्रगति पर अपने व्याख्यान में कहा कि हमारे देश की कृषि आज भी चैराहे पर है, हमारे देश के किसान आज भी कई तकनीकों से अनभिज्ञ हैं.

आज हमारा देश खाद्यान्न तथा फल एवं सब्जी उत्पादन में आत्मनिर्भर है लेकिन गुणवत्ता एवं पोषण आज एक मुख्य चुनौती है. अधिक उत्पादकता के साथ मृदा का बिगड़ता स्वास्थ्य एक चिंता का विषय है. हमारे देश में 37.6 मिलियन टन शीत भंडारण सुविधा उपलब्ध है जिसमें से 70 प्रतिशत केवल आलू के लिए ही उपयोग में लाई जाती है तथा यह अन्य किसी उद्यानिकी फसलों के लिए उपयुक्त नहीं है अतःशीत भंडारण का निर्माण फसल के अनुरूप होना चाहिए. आज राष्ट्र के कृषकों को डेटा विज्ञान व नई तकनिकियों से जोड़ने की आवश्यकता है, जिससे वेे अपने ज्ञान में वृद्धि कर उन्न्त कृषि अपनाकर आय में वृद्धि कर सकेंगें.

डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़, कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur) ने कहा कि हमारे देश में 142 मिलियिन हेक्टर भूमि पर खेती की जाती है. वर्तमान में डिजिटल तकनीकी का कृषि में सुनहरा भविष्य है. आज पूरे विश्व स्तर पर ब्लाॅक चेन तकनीकी, वायरलेस मृदा सेंसर, आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस एवं इन्अरनेट आॅफ थिंग्स का कृषि में बहुतायत में प्रयोग हो रहा है. आज सीमांत क्षेत्रों में अनुसंधान की आवश्यकता है. डॉ. राठौड ने कहा कि प्रत्येक संस्था में एक इन्क्यूबेशन सेंटर होना चाहिए जहांनई प्रौद्योगिकी सार्थक अनुसंधान व औद्योगिक इकाईयों से संबंध स्थापित किये जाने चाहिए तथा प्रत्येक अनुसंधान सामजिक दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिए. वर्तमान समय में शिक्षा को उद्यमिता से जोड़ना बहुत आवश्यक है. इस प्रकार के अनुसंधान से हमारे देश में खाद्य व पोषण सुरक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा एवं अनुसंधान की सार्थकता सिद्ध होगी.

डाॅ. एस.के. शर्मा, निदेशक अनुसंधान ने आगंतुकों का स्वागत किया तथा विश्वविद्यालय में शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार के क्षेत्र में हो रही गतिविधियों के बारे में सदन को बताया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राजस्थान (Rajasthan) के दो जलवायु क्षेत्रों के 7 जिलों में कार्य कर रहा है तथा विश्वविद्यालय में कई नवाचार हुए हैं जिनमें 7किस्मों का विकास हुआ तथा दो नई मशरूम की प्रजातियां विकसित की गई है. इसके अलावा विश्वविद्यालय में कृषि में डिजिटलीकरणको अपनाया जा रहा है और इस हेतु संस्थान में डिजिटल सेल की स्थापना की गई है.

डॉ. पी. के. सिंह, अधिष्ठाता, प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय,डाॅ. दिलीप सिंह, अधिष्ठाता,राजस्थान (Rajasthan) कृषि महाविद्यालय, डॉ. मीनू श्रीवास्तव,अधिष्ठाता,सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय,उदयपुर (Udaipur) ने अपने संस्थानों में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों एवं प्रगति प्रतिवेदन की जानकारी सदन को दी. अंत में अतिथियों का धन्यवाद डाॅ. आर.ए. कौशिक, निदेशक प्रसार शिक्षा द्वारा प्रेषित किया गया एवं कार्यक्रम संचालन डाॅ. रेखा व्यास, क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक ने किया.

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