कांग्रेस एकजुट होकर पंजाब में बदलाव लाएगी, भाजपा में कोई लोकतंत्र नहीं: प्रताप सिंह बाजवा

चंडीगढ़, 7 जुलाई . पंजाब कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक गतिविधियों के बीच नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सभी नेताओं और समुदायों को साथ लेकर आगे बढ़े तो वह पंजाब में प्रभावी बदलाव ला सकती है. उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था और नशे की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है और इन चुनौतियों से निपटने के लिए अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता है. साथ ही, उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र है, जबकि भाजपा में निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं है.

कांग्रेस के पंजाब प्रभारी के चंडीगढ़ पहुंचने के दौरान पूर्व Chief Minister चरणजीत सिंह चन्नी के दिल्ली जाने को लेकर उठे सवालों पर बाजवा ने कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक Political रंग नहीं दिया जाना चाहिए. चन्नी देश से बाहर नहीं गए हैं, बल्कि दिल्ली भी देश का ही हिस्सा है. संभव है कि वह प्रभारी से मिलकर गए हों या वापस आकर मुलाकात कर लें. कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल कई दिनों तक पंजाब में रहेंगे, इसलिए किसी नेता के आने-जाने को लेकर Political अर्थ निकालना उचित नहीं है. उन्होंने सभी नेताओं से एकजुट होकर काम करने की अपील करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस संगठित होकर आगे बढ़े तो पंजाब में सकारात्मक बदलाव संभव है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और पार्टी में सबसे अधिक अनुभवी नेता मौजूद हैं. पंजाब को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जिसे शासन चलाने का अनुभव हो, जनता के बीच काम करने का अनुभव हो और जो सभी वर्गों, जातियों तथा धर्मों को साथ लेकर चल सके. पंजाब का इतिहास हमेशा से धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रीय सोच रखने वाली पार्टियों का समर्थन करने का रहा है. कांग्रेस के पास पंजाब में सत्ता में वापसी का सबसे अच्छा अवसर है क्योंकि राज्य की जनता बदलाव चाहती है. राज्य की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. लोगों की जान-माल सुरक्षित नहीं है, व्यापार प्रभावित हो रहा है और बड़ी संख्या में युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं. राज्य Government नशीले पदार्थों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में पूरी तरह विफल रही है. इन परिस्थितियों में कांग्रेस के सभी नेताओं को व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए ताकि राज्य को सक्षम नेतृत्व और बेहतर प्रशासन दिया जा सके.

चरणजीत सिंह चन्नी गुट के कुछ नेताओं द्वारा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग के कार्यक्रमों के बहिष्कार की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए बाजवा ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार नेता एक समय कोई बयान देते हैं और बाद में परिस्थितियों के अनुसार अलग निर्णय लेते हैं. उन्होंने पूर्व Chief Minister कैप्टन अमरिंदर सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी कभी कहा था कि भाजपा में उनकी सुनवाई नहीं हो रही, लेकिन बाद में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी हुई. कांग्रेस का कार्यकर्ता अंततः कांग्रेस में ही रहेगा और पार्टी के भीतर अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलता है.

उन्होंने नेताओं से अपील की कि यदि किसी को संगठनात्मक फैसलों पर आपत्ति है तो उसे पार्टी हाईकमान के सामने अपनी बात रखनी चाहिए. पार्टी के भीतर संवाद और समीक्षा की पूरी व्यवस्था मौजूद है और हर नेता को अपनी बात रखने का अधिकार है.

पार्टी संगठन में हाल में हुए बदलावों को लेकर पूछे गए सवाल पर बाजवा ने कहा कि बदलाव राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को परिवर्तन पसंद आते हैं और कुछ को नहीं, लेकिन यदि किसी को किसी फैसले पर आपत्ति है तो वह पार्टी नेतृत्व से चर्चा कर सकता है. उन्होंने विश्वास जताया कि हाईकमान सभी पक्षों की बात सुनता है और उचित निर्णय लेता है.

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के उस बयान पर भी बाजवा ने पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेताओं का भाजपा में स्वागत करने की बात कही थी. इस पर बाजवा ने मशहूर शेर का हवाला देते हुए कहा, “दिल के बहलाने के लिए ‘गालिब’ ये खयाल अच्छा है.” उन्होंने दावा किया कि भाजपा में शामिल हुए कई वरिष्ठ नेताओं को अपेक्षित Political महत्व नहीं मिला. उन्होंने पूर्व Chief Minister कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ और Union Minister रवनीत सिंह बिट्टू का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा में उन्हें सक्रिय भूमिका नहीं मिल रही है.

बाजवा ने कहा कि कांग्रेस में प्रत्येक नेता को सम्मान और अपनी बात रखने का अवसर मिलता है. पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र मजबूत है, जबकि भाजपा में शीर्ष नेतृत्व की अनुमति के बिना निर्णय लेना या स्वतंत्र रूप से काम करना संभव नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं को आखिर क्या Political अवसर मिलेगा.