कांग्रेस सांसद ने की पप्पू यादव पर हुए हमले की निंदा, बांकीपुर में मतगणना को लेकर प्रशांत किशोर को दी शुभकामनाएं

New Delhi, 3 अगस्त . कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने पप्पू यादव पर हुए कथित हमले की निंदा की है. उन्होंने कहा कि अगर आपसे लोग असहमत हैं तो वे हिंसात्मक कार्रवाई पर उतर जाते हैं, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. इसके साथ ही, सुखदेव भगत ने बांकीपुर में मतगणना के बीच प्रशांत किशोर को शुभकामनाएं दी हैं.

पप्पू यादव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए कथित हमले पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “अगर आपसे लोग असहमत हैं तो वे हिंसात्मक कार्रवाई पर उतर जाते हैं, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. अगर वे (पप्पू यादव) कुछ कह रहे हैं और आप असहमत हो, तो इस प्रकार की प्रतिक्रिया (हमला) नहीं आना चाहिए. मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं.”

उन्होंने आगे कहा, “एक प्रकार से यह अभिव्यक्ति पर हमला है. Government इन चीजों को देखे और कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे.”

बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद ने प्रशांत किशोर को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा, “वे पूरे चुनाव के रणनीतिकार खुद रहे हैं. देखना होगा कि वे अपनी नीति में कितने सफल हो पाते हैं और जनता का कितना विश्वास जीत पाते हैं. उन्होंने बहुत सारे वादे किए थे और हम अपेक्षा करते हैं कि वे उनका पर खरा उतरेंगे.”

सुखदेव भगत ने कहा, “लोकतंत्र में दोनों चीजें हैं और मेरा मानना है कि जब प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी नहीं बनाई थी, तब उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था और इस बार वह चुनाव लड़ रहे हैं. उन्हें मेरी ओर से शुभकामनाएं हैं.”

कर्नाटक Police भर्ती परीक्षा पर उठ रहे सवालों को लेकर कांग्रेस सांसद ने कहा, “मैं समझता हूं कि यह Government की जिम्मेदारी बनती है. बहुत बार होता है कि ट्रैफिक या अन्य कारणों से भी पेपर लाने में देरी होती है. अगर ज्यादा गैप हो तो लोग शक के दायरे में आते हैं. फिलहाल इस पर Government को स्पष्ट रूप से जवाब देना चाहिए और अपनी जिम्मेदारी को बरकरार रखने का प्रयास करना चाहिए.”

केंद्र Government की ओर से संसद में पेश होने वाले विधेयकों पर सुखदेव भगत ने कहा, “आज भी जो विधेयक लाए जा रहे हैं, मेरा मानना है कि उन पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए. Government के पास बहुमत है और ध्वनिमत से विधयेक पारित करा देती है, लेकिन नहीं होना चाहिए कि विधेयकों पर चर्चा न हो. सत्तापक्ष की जिम्मेदारी बनती है कि वो विपक्ष को बोलने का अवसर दे और सार्थक चर्चा करे. “

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