
Mumbai , 19 मई . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने पश्चिम बंगाल Government के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें इमामों के अलाउंस को खत्म करने का फैसला किया गया. Government का कहना है कि इन पैसों का इस्तेमाल शिक्षा के क्षेत्र में किया जाएगा.
कांग्रेस नेता ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि हमें इस बात से कोई हर्ज नहीं है कि अगर इमामों को दिए जाने वाले पैसों का इस्तेमाल शिक्षा के क्षेत्र में किया जाएगा, लेकिन, आपको पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि इन पैसों का इस्तेमाल हर हाल में शिक्षा के क्षेत्र में ही हो और इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार न की जाए.
उन्होंने कहा, मैंने खुद करीब से इमामों की स्थिति को देखा है. आमतौर पर इन लोगों की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण रहती है. मुसलमानों की भी गलती है कि वो लगातार ऐसी Governmentों का चयन कर रहे हैं, जो उनके हितों पर कुठाराघात कर रही है.
उन्होंने कहा कि मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि पश्चिम बंगाल की Government ने गलत फैसला किया है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि कोई भी इमाम अमीर नहीं होता. आमतौर पर गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले लोग ही इमाम बनते हैं. जिस तरह से इमामों को दिए जाने वाले अलाउंस पर रोक लगाया गया है, इसकी वजह से अब उनके परिवार के लिए भूखे मरने की नौबत आ चुकी है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने कहा कि अब अगर यह लोग कह रहे हैं कि हम इन पैसों का इस्तेमाल शिक्षा के क्षेत्र में करेंगे, तो करिए ना, आपको किसने रोका है? लेकिन, मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि इस फैसले की वजह से इमामों की संख्या में कमी दर्ज की जाएगी.
उन्होंने केंद्र Government के उस दावे पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें यह कहा गया कि हम नक्सलमुक्त हो चुके हैं. इस पर हुसैन दलवई ने कहा कि इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद गलत है. मैं इसका बिल्कुल भी समर्थन नहीं करता हूं. नक्सलवाद में निहित विचार गलत नहीं है, लेकिन जिस तरह से इसमें हिंसा को जगह दी जाती है, वो गलत है. आज की तारीख में हिंसा क्यों बढ़ रही है, क्योंकि Government आवाज उठाने का मौका नहीं दे रही है.
इसके अलावा उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस तरह से जम्मू-कश्मीर में पथराव की घटनाएं समाप्त हो चुकी हैं, अब ठीक उसी प्रकार से पश्चिम बंगाल में भी समाप्त हो जाएंगी. मुझे व्यक्तिगत रूप से पथराव की घटना बिल्कुल भी पसंद नहीं है.
उन्होंने तमिलनाडु की द्विभाषा नीति पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य पर इस तरह से अपनी नीति थोपना किसी भी सूरत में ठीक नहीं है. आप किसी को भी जबरन कोई भी भाषा नहीं सिखा सकते हैं. अगर उनकी मर्जी नहीं कि वो कोई दूसरी भाषा सीखे. अब ऐसी क्या जरूरत है कि आप हिंदी सीखाए. कांग्रेस ने अपने शासनकाल में सभी राज्यों को एकजुट करने की कोशिश की.
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने असम Police की क्राइम ब्रांच ने पासपोर्ट विवाद मामले में समन किया है. इस पर हुसैन दलवई ने कहा कि अगर कोई आरोप है, तो उसके बारे में बताइए. सबको बोलने का अधिकार है.
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एसएचके/
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