
Mumbai , 5 जुलाई . कांग्रेस ने बृहन्Mumbai नगर निगम (बीएमसी) को तीन हिस्सों में बांटने की मांग उठाई है. पार्टी नेता हुसैन दलवाई ने कहा कि इसे तीन अलग-अलग नगर निगमों में बांट दिया जाना चाहिए.
कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “बीएमसी का दायरा इतना बड़ा हो गया है कि मेरे हिसाब से इसे तीन अलग-अलग नगर निगमों में बांट देना चाहिए. एक ही कमिश्नर के लिए हर जगह जाकर हालात की निगरानी करना संभव नहीं है. अतिरिक्त आयुक्त भी हर स्थान पर नहीं पहुंच सकते. यह उनकी व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि व्यवस्था की समस्या है.”
उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट में भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए. दलवाई ने कहा, “निचले स्तर पर स्थिति यह है कि कॉन्ट्रैक्ट मिलने पर पैसे मांगे जाते हैं और इसके बाद कॉन्ट्रैक्टर खराब तरीके से काम करता है. बाद में जिम्मेदार व्यक्ति कॉन्ट्रैक्टर को नहीं पकड़ते हैं. खराब काम करने वाले कॉन्ट्रैक्टरों को ब्लैक लिस्टेड कर देना चाहिए.”
इसी बीच, कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने बयान दिया है कि वे समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के खिलाफ नहीं है. उन्होंने मांग की कि यूसीसी का ड्राफ्ट लोगों तक पहुंचना चाहिए, ताकि हम लोग भी सुझाव दे सकें.
कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने से बात करते हुए कहा, “यूसीसी पर कांग्रेस की क्या भूमिका होगी, यह पार्टी का हाईकमान तय करेगा. मेरा कहना है कि आप यूसीसी में क्या लाने वाले हैं? उसका ड्राफ्ट लोगों तक पहुंचने दें, हमें उसे पढ़ने दें. मुस्लिमों में भी कई ऐसी बातें हैं, जो महिलाओं की सुरक्षा करती हैं. महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय को खत्म करें. एक से अधिक शादियाँ करना गलत है, इस्लाम इसे जरूरी नहीं मानता. शिक्षा बढ़ने के साथ बहुविवाह में कमी आई है. मुस्लिमों में बच्चों की संख्या भी कम हो रही है. झुग्गी-बस्तियों में देखें, वहां दो से अधिक बच्चे नहीं होते.”
हुसैन दलवाई ने कहा कि अभी मुस्लिमों में एक से अधिक पत्नियां नहीं हैं, लेकिन एक से अधिक पत्नियां जैन और हिंदुओं में भी हैं. उन्होंने कहा, “मैं बिल्कुल भी यूसीसी के खिलाफ नहीं हूं. मैं इसका स्वागत करूंगा, लेकिन यूसीसी ड्राफ्ट लोगों तक आना चाहिए. पढ़ने के बाद हम लोग भी अपने सुझाव रख सकते हैं. इसमें जल्दबाजी करने की जरूरत क्यों है?”
20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मॉनसून सत्र पर हुसैन दलवाई ने कहा, “विपक्ष के सदस्यों को बोलने नहीं दिया जाता है. बोलते समय वे हंगामा करते हैं. वे सही सवाल उठाने के लिए तैयार नहीं होते हैं.”
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डीसीएच/
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