कम्युनिज्म अमेरिका के सामने सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा, समय रहते निपटना बेहद जरूरी: राष्ट्रपति ट्रंप

वाशिंगटन, 2 जुलाई . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ डकोटा में आयोजित थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में पूर्व President थियोडोर रूजवेल्ट को याद करते हुए साम्यवाद (कम्युनिज्म) पर निशाना साधा. ट्रंप ने संबोधन में कहा कि आज के समय में कम्युनिज्म अमेरिका के सामने सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है और इससे समय रहते निPatna बेहद जरूरी है.

Wednesday (स्थानीय समय) को आयोजित कार्यक्रम में President ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है. ऐसे समय में थियोडोर रूजवेल्ट के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, खासकर कम्युनिज्म के खिलाफ उनका स्पष्ट रुख.

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “थियोडोर रूजवेल्ट कम्युनिज्म के कट्टर और बेहद मजबूत विरोधी थे.” इसके बाद उन्होंने रूजवेल्ट के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा, “यदि कम्युनिस्ट समाजवाद के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन किया जाए, तो सभ्यता का विनाश हो जाएगा.”

ट्रंप ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कम्युनिस्ट विचारधारा अमेरिका के लिए लंबे समय में उन कई बड़े संकटों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है, जिनका देश पहले सामना कर चुका है.

उन्होंने कहा, “आज हम जो देख रहे हैं, उसके मुताबिक कम्युनिज्म हमारे देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है. मुझे लगता है कि यह संभावित रूप से प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, पर्ल हार्बर और 11 सितंबर के आतंकी हमलों से भी बड़ा खतरा बन सकता है, क्योंकि यह कैंसर की तरह फैलता है और इसे जल्दी रोकना जरूरी है.”

ट्रंप ने दो टूक में कहा, “हम कभी भी अमेरिका को कम्युनिस्ट देश नहीं बनने देंगे. ऐसा कभी नहीं होगा.”

President ने अपने भाषण को अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि यह अवसर देश के इतिहास, साहस और राष्ट्रीय पहचान को याद करने का है.

उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम अपनी आजादी के 250वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, अमेरिकियों को कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम एक ऐतिहासिक, वीर और महान उद्देश्य वाले लोग हैं.”

ट्रंप ने थियोडोर रूजवेल्ट की Political सोच का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ‘न्यू नेशनलिज्म’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया था, जिसमें पूरे देश और सभी नागरिकों के हितों को दलगत राजनीति, लॉबिस्ट, पहचान की राजनीति और विशेष हितों से ऊपर रखा गया.

उन्होंने कहा कि रूजवेल्ट का मानना था कि किसी भी महान और स्वतंत्र राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसका साहस और ऊंचे लक्ष्य होते हैं.

ट्रंप ने रूजवेल्ट का एक और प्रसिद्ध कथन दोहराते हुए कहा, “आजादी कायरों के हाथों में लंबे समय तक नहीं टिकती.”

उन्होंने कहा कि रूजवेल्ट ऐसे अमेरिका में विश्वास करते थे जो मेहनत करता है और विफलता, औसत दर्जे, भ्रष्टाचार, गिरावट और पतन को कभी स्वीकार नहीं करता.

अपने संबोधन में ट्रंप ने अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का भी जोरदार बचाव किया. उन्होंने कहा, “अगर हमारी स्वतंत्रता की घोषणा 250 साल बाद भी कोई मायने रखती है, तो उसका सबसे बड़ा संदेश यही है कि हमारी Government का पहला कर्तव्य केवल अमेरिकी लोगों की सेवा करना है. यानी अमेरिका को सबसे पहले रखना.”

हालांकि कार्यक्रम का मुख्य विषय थियोडोर रूजवेल्ट की विरासत था, लेकिन ट्रंप ने अपने भाषण में आव्रजन (इमिग्रेशन), अर्थव्यवस्था, ऊर्जा नीति, पनामा नहर और ईरान जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया.

बता दें कि थियोडोर रूजवेल्ट अमेरिका के 26वें President थे, और उन्होंने 1901 से 1909 तक देश का नेतृत्व किया. उन्हें राष्ट्रीय उद्यान प्रणाली के विस्तार, पर्यावरण संरक्षण संबंधी नीतियों को मजबूत करने और दुनिया में अमेरिका की भूमिका बढ़ाने के लिए जाना जाता है. माना जाता है कि नॉर्थ डकोटा में बिताए गए उनके वर्षों ने उनकी Political सोच को गहराई से प्रभावित किया.

बता दें किथियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी का उद्घाटन ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका 4 जुलाई को अपनी स्वतंत्रता घोषणा की 250वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है. ट्रंप प्रशासन इस ऐतिहासिक अवसर को देशभक्ति, राष्ट्रीय इतिहास और अमेरिकी पहचान के बड़े उत्सव के रूप में मना रहा है.

डीकेपी