राष्ट्रमंडल दिवस: ब्रिटिश साम्राज्य की विरासत से सहयोग की नई इबारत तक

New Delhi, 23 मई . एक समय में दुनिया के एक बड़े हिस्से पर राज करने वाला ब्रिटिश साम्राज्य अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है. हालांकि, उस दौर की विरासत राष्ट्रमंडल के रूप में आज भी जीवित है. 24 मई को मनाया जाने वाला राष्ट्रमंडल दिवस उन देशों के साझा इतिहास, सांस्कृतिक जुड़ाव और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है जो कभी ब्रिटिश शासन का हिस्सा रहे. यह दिवस इस बात की भी याद दिलाता है कि इतिहास की कड़वी और मीठी विरासतों को साथ लेकर कैसे राष्ट्र सहयोग और साझेदारी की नई इबारत लिख रहे हैं.

राष्ट्रमंडल दिवस इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है. महारानी विक्टोरिया का जन्म 24 मई 1819 को हुआ था. उनके शासनकाल में ब्रिटिश साम्राज्य ने दुनिया के बड़े भूभाग पर अपना प्रभाव स्थापित किया. यही कारण है कि 24 मई को राष्ट्रमंडल से जुड़े देशों में विशेष महत्व दिया गया.

शुरुआत में इस दिन को ‘साम्राज्य दिवस’ के रूप में मनाया जाता था. 1916 के बाद महारानी विक्टोरिया की स्मृति में इसे व्यापक रूप से मनाने की परंपरा शुरू हुई. लॉर्ड मीथ ने 1916 में साम्राज्य दिवस के आयोजन का विस्तार करते हुए इसे ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े सभी देशों तक पहुंचाया. धीरे-धीरे यह केवल ब्रिटिश सत्ता के गौरव का प्रतीक न रहकर सदस्य देशों के बीच संबंधों और सहयोग का माध्यम बन गया. इसके बाद 1958 में यूनाइटेड किंगडम के तत्कालीन Prime Minister हेरोल्ड मैकमिलन ने ब्रिटिश संसद में घोषणा की कि ‘साम्राज्य दिवस’ का नाम बदलकर ‘राष्ट्रमंडल दिवस’ किया जाएगा.

इतने सालों के बाद भी राष्ट्रमंडल देशों के बीच कई समानताएं देखने को मिलती हैं. कानूनी व्यवस्थाओं, प्रशासनिक ढांचे, शिक्षा प्रणाली और व्यापारिक प्रक्रियाओं में ब्रिटिश प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. अंग्रेजी भाषा इन देशों के बीच संवाद का प्रमुख माध्यम बनी हुई है.

खास बात यह है कि अलग-अलग देशों में राष्ट्रमंडल दिवस अलग-अलग दिन मनाया जाता है. यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देश इसे मार्च के दूसरे Monday को मनाते हैं, जबकि India और बेलीज जैसे देशों में यह 24 मई को आयोजित किया जाता है. इस दिवस को हर साल एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, ताकि सदस्य देश उस विषय के महत्व को समझें और उसे अपने सामाजिक व राष्ट्रीय जीवन में आत्मसात कर सकें.

राष्ट्रमंडल दिवस अतीत की याद के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं का प्रतीक बन चुका है. जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, युवा सशक्तिकरण, लोकतंत्र और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर राष्ट्रमंडल देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है. जब दुनिया Political और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही होती है, तब राष्ट्रमंडल दिवस साझा मूल्यों और वैश्विक एकजुटता का संदेश देता है.

/पीएम