बीटी कपास के लिए बच्चों की तस्करी को आयोग ने माना गंभीर, प्रशासन को देंगे निर्देश · Indias News

बीटी कपास के लिए बच्चों की तस्करी को आयोग ने माना गंभीर, प्रशासन को देंगे निर्देश

बीएसएन की बैठक, बच्चों के लिए सपोर्ट पर्सन किया नियुक्त

उदयपुर (Udaipur). वैश्विक महामारी (Epidemic) कोरोनावायरस कॉविड 19 के इस भयावह दौर में बाल सुरक्षा नेटवर्क एवं इससे संबंधित सदस्य संस्थाएं बच्चों के मुद्दों में अपनी सशक्त पैरवी करने में अग्रणी भूमिका निभाएं और संबंधित विभागों के साथ मिलकर समन्वित प्रयास करें जिससे बच्चे सुरक्षित किए जा सकें. आदिवासी क्षेत्र उदयपुर (Udaipur) से गुजरात बीटी कपास के लिए जा रहे हैं बच्चों की तस्करी की को आयोग ने भी गंभीर माना.

बच्चों के सर्वोत्तम हित को लेकर उदयपुर (Udaipur) संभाग सहित प्रदेश में काम कर रहे अग्रणी बाल सुरक्षा नेटवर्क एवं आजीविका ब्यूरो उदयपुर (Udaipur) के संयुक्त तत्वावधान में बालकों के अधिकारों एवं उनके हितों पर काम करने वाली विभिन्न संस्थाओं की बैठक में यह विचार बाल संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ शैलेंद्र पंड्या ने व्यक्त किए. कोविड-19 (Covid-19) के मध्य नजर बैठक के दौरान सरकार (Government) के एडवाइजरी का पालन करते हुए 2 गज की दूरी और मुंह पर मास्क हाथ में सेनीटाइजर का पूरा उपयोग किया गया.

पंड्या ने कहा कि बच्चों के मुद्दों पर काफी बातें हो चुकी हैं लेकिन जमीनी सतह पर जाकर उनके लिए व्यापक रिसर्च कर डाटा तैयार करने की आवश्यकता है. बच्चों के समस्याओं तथा इनके डेटाबेस तैयार होने से ही बच्चों को हर तरीके से सुरक्षित किया जा सकता है.

डॉ पंड्या ने कहा कि बच्चों के सर्वोत्तम हित को सुरक्षित रखने के लिए तथा विभिन्न राज्यों से गुजरने वाले बच्चों को उनके मूलभूत और बुनियादी अधिकार दिलाए जाने के लिए राज्य सरकार (Government) बाल अधिकार आयोग बाल कल्याण समिति किशोर न्याय बोर्ड और जमीनी स्तर पर काम कर रहा बाल सुरक्षा नेटवर्क एवं विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं बेहतरीन काम कर रही है.

बैठक में बाल कल्याण समिति अध्यक्ष ध्रुव कुमार चारण ने उपस्थित सभी संस्थाओं से बच्चों के क्षेत्र में तथा उनके परिजनों को विधिवत शिक्षित करने सामाजिक योजनाओं की जानकारी देने तथा सामाजिक बुराइयों के विपरीत जागरूकता लाने का आह्वान किया ताकि समाज के संचित वर्ग की कमियों को दूर किया जा सके.

बैठक में बाल सुरक्षा नेटवर्क के सदस्य एडवोकेट हरीश पालीवाल ने बीटी कपास के लिए उदयपुर (Udaipur) से जा रहे बच्चों के पलायन को रोकने शहर में भिक्षावृत्ति लिप्त बच्चों बाल श्रमिक बच्चों को काम कराने वाले नियोक्ताओं पर विधिवत रूप से मुकदमे दर्ज करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह के लिए बच्चियों के बेचान करने वाले दलालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.

बैठक के प्रारंभ में बाल सुरक्षा नेटवर्क के संयोजक बालकृष्ण गुप्ता ने एक दशक से काम कर रहे बाल सुरक्षा नेटवर्क की कार्यकलापों तथा लोक डाउन से अनलॉक डाउन पीरियड तक नेटवर्क द्वारा बच्चों के सर्वोत्तम हित को लेकर किए गए कार्यों एवं विशेष देखभाल एवं संरक्षण वाले बच्चों के लिए किए गए सकारात्मक कार्यों की जानकारी दी.

बैठक में नेटवर्क की सदस्य डॉ राजकुमारी भार्गव ने नेटवर्क द्वारा अनलॉक पीरियड में बच्चों के लिए आगे किए जाने वाले कार्यक्रम तथा उसमें नेटवर्क की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की तथा इस पीरियड में बच्चों पर होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष संवेदनशीलता दिखाने की अपील की है.

आजीविका ब्यूरो की आभा मिश्रा ने आगामी 3 माह में बच्चों पर होने वाले घरेलू हिंसाए, स्कूल के बंद रहते राशन व मिड-डे-मील नहीं मिलने से परेशान बच्चों की समस्याओं व इनके कारण कि जाने वाले अपराधों पर प्रकाश डाला उन्होंने लोक डाउन पीरियड में बच्चों पर अपराध बढ़ने घटनाओं पर चिंता व्यक्त की.

आजीविका ब्यूरो के कार्यक्रम समन्वयक संतोष पुनिया ने बताया कि दीपावली तक गुजरात में बीटी कपास की खेती चरम पर होती है इस दौरान उदयपुर (Udaipur) जिले के गोगुंदा कोटडा सायरा झाडोल फलासिया एवं आसपास के क्षेत्रों से बच्चों की लगातार हो रही तस्करी पर अंकुश कसने की मांग की पुनिया ने इस काम में बाल सुरक्षा नेटवर्क बाल कल्याण समिति बाल संरक्षण आयोग एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से पुलिस (Police) को अपने अपने स्तर पर सख्त निर्देश जारी करवाने के लिए सुझाव दिया ताकि बच्चों का पलायन रोका जा सके.

श्री आसरा विकास संस्थान के सदस्य भोजराज सिह पदमपुरा ने बच्चों के काम में नेटवर्क के माध्यम से अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा बच्चों के बारे में दी जाने वाली जानकारी पर संवेदनशील होकर काम करने पीड़ित बच्चों को पुन निर्वाचित करने तथा पीड़ित प्रतिकर दिलाए जाने की पहल कराने की मांग की भोजराज सिंह पदमपुरा ने कहा कि बच्चों के मुद्दे में कार्रवाई यों के संदर्भ में बाल कल्याण समिति एवं बाल सुरक्षा नेटवर्क तत्काल केस के लिए सपोर्ट पर्सन नियुक्त करना चाहिए ताकि सपोर्ट पर्सन के माध्यम से पीड़ित पक्ष सरकार (Government) की योजना का पूरा लाभ ले सके.

चाइल्ड फंड इंडिया के कार्यक्रम संबंधित पन्नालाल नेम बच्चों के संदर्भ में काम करने वाले तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के लिए चाइल्डफंड के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने का सुझाव दिया और इस काम में सहभागीता देने की पहल की. नेटवर्क की ओर से वरिष्ठ सदस्य डॉ सुशील दशोरा ने सभी का आभार व्यक्त किया. बैठक में बाल कल्याण समिति की सदस्य शिल्पा मेहता चाइल्डलाइन उदयपुर (Udaipur) की समन्वयक विमला चौहान स्वयंसेवी संस्था के अमित राव कासिया संस्थान की ओर से भोमाराम एवं फोस्टर केयर संस्थान केह अनुराग मेहता भी उपस्थित थे.

प्रदेशभर मैं देंगे सदस्यता नेटवर्क में

बालकों के क्षेत्र में काम करने वाली सनसनी संस्थाओं को बाल सुरक्षा नेटवर्क में जोड़ने के प्रयोजन से सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इसका कार्यक्षेत्र उदयपुर (Udaipur) संभाग से बढ़ाकर प्रदेश के सातों संभाग मुख्यालय तक ले जाया जाएगा पहले दौर में जयपुर (jaipur) और भरतपुर की स्वयंसेवी संस्थाओं को नेटवर्क से जोड़ा गया है.

सपोर्ट पर्सन के लिए हरीश पालीवाल को किया नियुक्त

बाल सुरक्षा नेटवर्क के संयोजक बीके गुप्ता ने बताया कि पोस्को प्रकरणों में दुष्कर्म पीड़िता बाल श्रम में रेस्क्यू किए गए नाबालिक बच्चों के परिजनों को राजस्थान (Rajasthan) पीड़ित प्रतिकर दिलाए जाने तथा नियोक्ताओं के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई करने तथा प्रकरण दर्ज कराने के लिए नेटवर्क की ओर से सपोर्ट पर्सन के रूप में एडवोकेट हरीश पालीवाल को नियुक्त किया गया है. नेटवर्क ने अपेक्षा की है कि बाल कल्याण समिति, जिला प्रशासन, पुलिस (Police) प्रशासन एवं बच्चों के क्षेत्र में काम कर रही स्वयंसेवी संस्थाएं नेटवर्क के साथी एडवोकेट हरीश पालीवाल का सहयोग बतौर सपोर्ट पर्सन के रूप में ले सकते हैं.

नेटवर्क के माध्यम से उठने वाली बच्चों की समस्याएं व सुझावों को प्रदेश में मिले मान्यता

बाल संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ शैलेंद्र पंड्या ने कहा कि बच्चों के क्षेत्र में काम करने वाली विभिन्न संस्थाएं अगर बाल सुरक्षा नेटवर्क के माध्यम से कोई सकारात्मक अच्छा रिसर्च कार्य एवं ग्रास रूट लेवल पर कोई योजना क्रियान्वित करती है तो उसे  बाल अधिकार आयोग  प्रदेश स्तर पर मान्यता देने का प्रयास करेगा.

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