कोच रवि शास्त्री की सीख ने युवा वॉशिंगटन सुंदर के लिए टॉनिक का काम किया

नई दिल्ली (New Delhi) . कोच रवि शास्त्री की ड्रेसिंग रूम में दी गई ‘दृढ़ता और प्रतिबद्धता’ की सीख ने युवा वॉशिंगटन सुंदर के लिए टॉनिक का काम किया हैं. जिसमें टेस्ट मैचों में भारत के लिए पारी का आगाज करना भी शामिल है. वॉशिंगटन भारत अंडर-19 के दिनों में ओपनिंग बल्लेबाज थे लेकिन उन्होंने अपनी ऑफ स्पिन को निखारा और भारतीय टी20 टीम में जगह बनाई. ब्रिस्बेन में भारतीय जीत में अहम भूमिका निभाने वाले वॉशिंगटन ने कहा, अगर मुझे कभी भारत की तरफ से टेस्ट मैचों में पारी का आगाज करने का मौका मिलता है,तब यह मेरे लिये वरदान होगा. मुझे लगता है कि मैं उसी तरह इस चुनौती के रूप में स्वीकार करूंगा जैसे हमारे कोच रवि सर ने अपने खेल के दिनों में किया था.

वॉशिंगटन ने गाबा में पहली पारी में 62 रन बनाकर भारत को मैच में बनाएं रखा और फिर दूसरी पारी में 22 रन की तेजतर्रार पारी खेली जिसमें पैट कमिन्स पर लगाया गया छक्का भी शामिल है. इसके अलावा उन्होंने चार विकेट भी झटके. उन्होंने कहा, रवि सर ने हमें खेल के अपने दिनों की प्रेरणादायी बातें बताई. जैसे कि कैसे उन्होंने विशेषज्ञ स्पिनर के तौर पर पदार्पण किया तथा चार विकेट लिये और न्यूजीलैंड के खिलाफ इस मैच में दसवें नंबर पर बल्लेबाजी की. वॉशिंगटन ने कहा, और वहां से वह कैसे टेस्ट सलामी बल्लेबाज बने और उन्होंने कैसे अपने जमाने के सभी शीर्ष तेज गेंदबाजों का सामना किया. मैं भी उनकी तरह टेस्ट मैचों में पारी की शुरुआत करना पसंद करूंगा.

उनका मानना है कि टेस्ट टीम में आए किसी युवा खिलाड़ी के लिए किसी बाहरी खिलाड़ी से प्रेरणा लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारतीय ड्रेसिंग रूम में ही कई आदर्श खिलाड़ी हैं. वॉशिंगटन को वनडे-टी20 सीरीज खत्म होने के बाद नेट गेंदबाज के रूप में ऑस्ट्रेलिया में रहने के लिए कहा गया. इससे उन्हें लाल गेंद से नेट पर काफी गेंदबाजी करने को मिली. भारत की तरफ से एक टेस्ट के अलावा 26 टी-20 और एक वनडे खेलने वाले वॉशिंगटन ने कहा, ‘इससे निश्चित तौर पर मुझे मदद मिली क्योंकि मुझे टेस्ट मैचों के लिये टीम में बने रहने के लिये कहा गया था.

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