गोवा: एनएचए के सीईओ के साथ सीएम प्रमोद सावंत की बैठक, स्वास्थ्य व्यवस्था के डिजिटलीकरण पर चर्चा

पणजी, 1 जुलाई . गोवा के Chief Minister डॉ. प्रमोद सावंत ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में डिजिटल सुधार और तकनीकी उन्नयन को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ सुनील कुमार बरनवाल और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में राज्य स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे.

जानकारी के अनुसार, गोवा Government राज्य को India का पहला पूरी तरह डिजिटाइज्ड हेल्थकेयर राज्य बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. इसके लिए आयुष्मान India डिजिटल मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत किया जा रहा है, जिससे दीन दयाल स्वास्थ्य सेवा योजना के लाभार्थियों को देशभर में बिना किसी बाधा के स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी.

Government ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह पहल गोवा में स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी, सुलभ, जुड़ी हुई और भविष्य-उन्मुख बनाने में मदद करेगी, जिससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलेगी.

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अब दीन दयाल स्वास्थ्य सेवा योजना के तहत सभी दावों का निपटान पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के माध्यम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य क्लेम्स एक्सचेंज के जरिए किया जाएगा.

इसके अलावा, राज्य के सरकारी अस्पतालों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए Prime Minister जन आरोग्य योजना के तहत मिलने वाले फंड का उपयोग किया जाएगा.

सरकारी बयान के अनुसार, यह कदम गोवा की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक आधुनिक, तेज और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है, जिससे राज्य के हर नागरिक को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की तरफ से किए गए एक social media पोस्ट में बताया गया है कि गोवा में India का पहला डिजिटल हेल्थ राज्य बनने की क्षमता है.

आयुष्मान India डिजिटल मिशन के तहत नॉर्थ गोवा मॉडल जिला पहल की राज्य स्तरीय उद्घाटन कार्यशाला को संबोधित करते हुए, एनएचए के सीईओ सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य का अगला चरण तकनीक बनाने का नहीं, बल्कि उसे अपनाने का है.

उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों से अपील की कि वे कागज आधारित प्रक्रियाओं से हटकर आयुष्मान India डिजिटल मिशन-सक्षम स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली अपनाएं, जिससे आयुष्मान India स्वास्थ्य खाता-लिंक्ड डिजिटलहेल्थ रिकॉर्ड्स बनाए जा सकें. इससे स्वास्थ्यकर्मियों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा और डेटा-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को लागू किया जा सकेगा.

एएमटी/डीकेपी