
अमरावती, 17 अप्रैल . आंध्र प्रदेश के पूर्व Chief Minister और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि जिन पार्टियों ने संसद में महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन वाले बिल का विरोध किया था, उन्हें खुद से यह सवाल करना चाहिए कि उन्होंने आखिर क्या हासिल किया है.
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के Lok Sabha में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में नाकाम रहने के बाद, जगन मोहन रेड्डी ने ‘एक्स’ पर उन पार्टियों से एक सवाल पूछा जिन्होंने इसके खिलाफ वोट दिया था.
उन्होंने यह आशंका जताई कि अगर 2026 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो दक्षिण के लिए स्थिति और भी खराब हो जाएगी.
उन्होंने पोस्ट किया, “विरोधी पार्टियों को खुद से गंभीरता से सवाल पूछना चाहिए; उन्होंने क्या हासिल किया है? जबकि असलियत यह है कि दक्षिण के लिए सीटें कम हो जाएंगी, वहीं महिला आरक्षण विधेयक को टाल दिया गया है! न तो दक्षिण को न्याय मिला और न ही महिलाओं को! अगर 2026 की जनगणना आती है, तो दक्षिण के लिए स्थिति और भी बदतर हो जाएगी; परिवार नियोजन के मामलों में अनुशासित रहने के लिए उन्हें और भी ज़्यादा सज़ा मिलेगी.”
आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष वाई. एस. शर्मिला रेड्डी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा की धोखेबाजी वाली चाल नाकाम हो गई है.
उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के मुद्दों को ढाल बनाकर गैर-कानूनी कानूनों को थोपने की साजिश कामयाब नहीं हो पाई है.
उन्होंने पोस्ट किया, “सशक्तिकरण की आड़ में संघवाद की भावना को कमजोर करने के मकसद से भाजपा की रची गई साज़िशें बेकार साबित हुई हैं. ‘इंडी’ गठबंधन की न्यायपूर्ण लड़ाई ने एनडीए के अन्याय पर जीत हासिल की है. लोकतंत्र की जीत हुई है. यह India की जनता की जीत है. यह सचमुच भाजपा के Political रूप से दुर्भावनापूर्ण एजेंडे का अंत है. यह Prime Minister Narendra Modi के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है, जिन्होंने महिलाओं के नाम पर ओछी राजनीति की, और भाजपा के मुंह पर भी, जो अपने धार्मिक कट्टरपन के लिए जानी जाती है.”
कांग्रेस नेता ने साफ किया कि जो गिरा, वह सिर्फ ‘बिना सोचे-समझे और दिशाहीन’ परिसीमन विधेयक था, न कि खुद महिला आरक्षण विधेयक.
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कभी भी महिला आरक्षण विधेयक का विरोध नहीं किया. “‘नारी’ (महिलाओं) के नाम पर असल में जो पेश किया गया, वह परिसीमन बिल के अलावा कुछ नहीं था. आज जिसे हराया गया, वह खास तौर पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं फिर से तय करने वाला बिल था. विपक्ष ने जिस साजिश को सफलतापूर्वक नाकाम किया, वह सिर्फ़ संविधान को बदलने की साजिश थी.”
उन्होंने आगे कहा, “महिला आरक्षण बिल, असल में, 2023 में ही मंजूर हो गया था. विपक्ष पर कीचड़ उछालना जारी रखने के बजाय, भाजपा को अब कम से कम, 2023 के महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करना चाहिए. भाजपा को एक बार और हमेशा के लिए यह साबित करना होगा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर वह सचमुच गंभीर है. सभी 543 संसदीय सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए.”
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एससीएच
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