
कोलकाता, 27 जुलाई . पश्चिम बंगाल में पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी के पिछले कार्यकाल के दौरान डायमंड हार्बर Lok Sabha क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की पहल पर मुफ्त ‘सेवाश्रय’ स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था. इस शिविर में मेडिकल इंटर्न और मेडिकल छात्रों ने भी हिस्सा लिया था. अब राज्य स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम और अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के अधिकारी उनसे पूछताछ करेंगे.
Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि मुफ्त ‘सेवाश्रय’ स्वास्थ्य शिविर के आयोजन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं. इसके बाद राज्य Government ने मामले की जांच अपराध जांच विभाग (सीआईडी) और पश्चिम बंगाल Police दोनों से कराने का फैसला किया.
जांच अधिकारी मेडिकल इंटर्न और मेडिकल छात्रों से यह जानना चाहेंगे कि उन्होंने ‘सेवाश्रय’ स्वास्थ्य शिविर में अपनी इच्छा से हिस्सा लिया था या उन पर उनके वरिष्ठ अधिकारियों या किसी Political नेता की ओर से दबाव डाला गया था.
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “अगर यह साबित होता है कि इनमें से कुछ लोगों ने अपनी मर्ज़ी से इन हेल्थ कैंप में हिस्सा लिया था, तो राज्य का शिक्षा विभाग उन्हें चेतावनी दे सकता है. साथ ही, उनसे लिखित रूप में यह वादा भी लिया जा सकता है कि जब तक उन्हें योग्य डॉक्टर के रूप में लाइसेंस नहीं मिल जाता, तब तक वे भविष्य में किसी भी निजी हेल्थ कैंप में हिस्सा नहीं लेंगे.”
हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर यह साबित होता है कि मेडिकल इंटर्न और छात्रों पर किसी तरह का दबाव डाला गया था, चाहे वह उनके वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से हो या किसी Political नेता की ओर से, तो मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई के लिए Police को सौंप दिया जाएगा.
साथ ही, राज्य का स्वास्थ्य विभाग यह भी जांच करेगा कि क्या उन्होंने इन मुफ्त हेल्थ कैंपों में अकेले हिस्सा लिया था या किसी वरिष्ठ और योग्य डॉक्टर की निगरानी में काम किया था. इसके अलावा, यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या उन्हें जानकारी थी कि कैंप में इस्तेमाल की गई दवाइयां और मेडिकल उपकरण कहां से लाए गए थे.
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “अगर मेडिकल इंटर्न और छात्रों को किसी योग्य डॉक्टर की निगरानी के बिना अकेले ऑपरेशन करने के लिए मजबूर किया गया, तो यह मेडिकल एथिक्स (चिकित्सा नैतिकता) के खिलाफ एक गंभीर और खतरनाक मामला है. इन कैंपों के आयोजकों ने न सिर्फ मरीजों की जान से खिलवाड़ किया, बल्कि मेडिकल छात्रों और इंटर्न के भविष्य को भी नुकसान पहुंचाया है.”
25 जुलाई को पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन, ‘सेवाश्रय’ मुफ्त हेल्थ कैंप को लेकर बयान देते हुए Chief Minister ने उन मरीजों की तस्वीरें दिखाईं, जिनके बारे में दावा किया गया कि कैंप में इलाज के बाद उनके हाथ या पैर काटने पड़े.
उन्होंने एक डॉक्टर द्वारा लिखा हुआ बताया जा रहा पत्र भी पढ़कर सुनाया, जिसमें पिछली Government के कार्यकाल के दौरान मुफ्त हेल्थ कैंप के संचालन में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे.
अभिषेक बनर्जी का सीधे नाम लिए बिना Chief Minister ने यह भी कहा कि एक बार आरोप साबित हो जाने पर, “मास्टरमाइंड भतीजा” जेल के पीछे होगा और कभी बाहर नहीं आ पाएगा.
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एसएचके/पीएम
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