सीआईए ने खुफिया मेमो जारी कर अपने जासूसों को खतरे के प्रति चेताया

वॉशिंगटन दुनियाभर में कई सरकारों का तख्‍तापलट करने वाली अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए इन दिनों बड़े संकट का सामना कर रही है. सीआईए ने माना है कि उसके जासूसों की खुफिया लिस्‍ट चीन और ईरान जैसे उसके दुश्‍मनों के हाथ लग गई है. ये दोनों ही अमेरिकी दुश्‍मन देश अब सीआईए के जासूसों और उन्‍हें सूचना देने वालों की हत्‍या कर रहे हैं. कई जासूसों की हत्‍या से घबराई सीआईए ने दुनियाभर में फैले अपने जासूसों को एक खुफिया मेमो जारी करके इस बड़े खतरे के प्रति आगाह किया है. रिपोर्ट के मुताबिक सीआईए ने अपने खुफिया संदेश में अपने सभी स्‍टेशनों और ठिकानों से कहा है कि काउंटरइंटेलिजेंस मिशन ने पिछले कुछ सालों में दर्जनों ऐसे मामलों का विश्‍लेषण किया है. यही नहीं इस मेमो में यह भी ठीक-ठीक बताया गया है कि कितने जासूसों की हत्‍या की गई है जो अपने आप में सीआईए के लिए असामान्‍य बात है. पूर्व अध‍िकारियों ने यह भी बताया है कि चीन और ईरान ने सीआईए के गोपनीय संचार सिस्‍टम में घुसपैठ करने में सफलता हासिल कर ली.

पूर्व अधिकारियों ने कहा कि सीआईए के इस नेटवर्क में मौजूद जासूसों की हत्‍या कर दी गई और अन्‍य जासूसों को एजेंसी को निकालकर उन्‍हें अन्‍य जगहों पर भेजना पड़ा. सीआईए ने अपने मेमो में कहा कि हमारे जासूस अपने सूत्र पर बहुत ज्‍यादा भरोसा न करें और विदेशी खुफिया एजेंसियों को कम मानकर न चलें. यही नहीं बहुत तेजी से आगे बढ़कर और संभावित खतरों पर पूरा ध्‍यान न देकर सीआईए के मिशन को संकट में न डालें. रूस, चीन, ईरान और पाकिस्‍तान ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी जासूसों की पहचान करके उन्‍हें मार दिया है. यही नहीं कुछ मामलों में तो ये एजेंट दूसरे देश से मिल गए और डबल एजेंट बन गए. सीआईए का मानना है कि कुछ अमेरिकी लोगों ने ईरान और चीन को उसके एजेंटों के बारे में सूचना दी जिससे ये जासूस उनकी पकड़ में आ गए. यही नहीं प्रतिद्वंदी खुफिया एजेंसियां बायोमिट्रीक स्‍कैन, चेहरे को पहचानने वाली तकनीक, एआई और हैकिंग तकनीक का इस्‍तेमाल करके सीआईए अधिकारियों पर नजर रख रहे हैं ताकि उनके सूत्रों की जानकारी की जा सके.

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