
काठमांडू, 10 अगस्त . नेपाल के अध्यागमन विभाग (आव्रजन विभाग) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच चीनी नागरिकों को सबसे अधिक निर्वासित किया गया. विभाग का कहना है कि ये लोग देश के आव्रजन नियमों का उल्लंघन कर रहे थे.
वार्षिक रिपोर्ट में, विभाग ने बताया कि नेपाल ने इस दौरान 695 चीनी नागरिकों को निकाला गया, जो देश से डिपोर्ट किए गए विदेशी नागरिकों का सबसे बड़ा हिस्सा है. नेपाल ने पांच साल में कुल 2,267 विदेशी नागरिकों को निर्वासित किया, जिसमें चीनी नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा थी.
वहीं दूसरे पायदान पर अमेरिकी नागरिक रहे. यूएस के 191 नागरिक डिपोर्ट किए गए और तीसरे नंबर पर बांग्लादेश रहा, जिसके 145 नागरिकों को डिपोर्ट किया गया. चौथे पर यूके और पांचवें पर Pakistan के नागरिक रहे.
विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कुछ देशों के नागरिक किस कदर इमिग्रेशन कानून का उल्लंघन करते हैं. इससे स्पष्ट है कि हमें नेपाल आने वाले विदेशी नागरिकों पर लगातार और पैनी नजर बनाए रखनी होगी.”
अध्यागमन विभाग, संबंधित कानूनों का उल्लंघन करने, वीजा शर्तों को तोड़ने या गैर-कानूनी कामों में लिप्त विदेशियों से कानून के मुताबिक जुर्माना वसूलने के बाद देश से निकाल देता है.
विभाग ने कहा, “डिपार्टमेंट ऑफ इमिग्रेशन ने फॉरेन नेशनल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एफएनएमआईएस) और ‘नेपालीपोर्ट’ के जरिए विदेशी नागरिकों पर नजर रख रहा है. उम्मीद है कि इससे आने वाले दिनों में सुधार देखने को मिलेगा और वीजा नियमों का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा.”
2025 में निकाले गए अपने नागरिकों की संख्या के मामले में भी चीन इस लिस्ट में सबसे ऊपर था. नेपाल ने उस साल कुल 523 विदेशी नागरिकों को देश से निकाला, जिनमें से 120 चीनी नागरिक थे, जो नेपाल के इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन करने के लिए निकाले गए सभी विदेशी नागरिकों का 22.94 प्रतिशत था. 2023 में चीनी नागरिकों का डिपोर्टेशन भी बहुत ज्यादा हुआ. अकेले उस साल 209 चीनी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया, जो 2023 में नेपाल से डिपोर्ट किए गए सभी विदेशी नागरिकों का 46 फीसदी था.
इमिग्रेशन डेटा से पता चलता है कि नेपाल से डिपोर्ट किए गए विदेशी नागरिकों की संख्या में हर साल काफी उतार-चढ़ाव आया है. 2025 में कुल 523 विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया, जो पांच साल के सालाना औसत 453 से लगभग 15 फीसदी ज्यादा है.
विभाग के मुताबिक, पांच सालों में सबसे अधिक डिपोर्टेशन 2022 में दर्ज किए गए, जब 570 विदेशी नागरिकों को निकाला गया, जबकि 2021 में 218 लोगों को निर्वासित किया गया जो सबसे कम था.
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केआर/
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