ताइवान संग चीन की तनातनी भारत को बनाएगी मालामाल

नई दिल्ली (New Delhi) . चीन और भारत के बीच लद्दाख सहित कई इलाकों में तनाव जारी है. चीन का ताइवान के साथ भी तनाव बढ़ा हुआ है. अक्टूबर के पहले हफ्ते में चीन के 150 से अधिक लड़ाकू विमान ताइवान की सीमा में आ गए थे. शी जिनपिंग ने हाल ही में एक बार फिर कहा है कि वह किसी भी हालात में ताइवान को चीन में मिलाएंगे. इस पर ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने कहा है कि एक उचित कारण हमेश से समर्थन आकर्षित करता है. हम अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और अपने लोगों की रक्षा के साथ ही क्षेत्रीय शांति बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. हम वह सब कर रहे हैं जो कि हम कर सकते हैं. हम साथ काम करने वाले समान विचारधारा वाले देशों की सराहना करते हैं. भारत और चीन के बीच बढ़े तनाव को लेकर कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को अपनी चीन पॉलिसी पर फिर से विचार करने की जरूरत है. कइयों का कहना है कि भारत को चीन की वन चाइना पॉलिसी के विरोध में आना चाहिए तो कइयों ने तिब्बत कार्ड आदि खेलने की सलाह दी है. लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत ताइवान के साथ मजबूत संबंध बनाकर चीन को कड़ा संदेश दे सकता है. एक रिपोर्ट बताती है कि ताइवान, भारत में 7.5 बिलियन डॉलर (Dollar) का सेमीकंडक्टर या चिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने को लेकर बातचीत कर रहा है. इन चिप्स का इस्तेमाल कंप्यूटर, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कार और मेडिकल इक्विपमेंट्स सहित कई जगहों पर किया जाता है. हाल ही में नई दिल्ली (New Delhi) स्थित चीनी दूतावास ने भारत के पत्रकारों से ताइवान के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर रिपोर्टिंग करते हुए ‘वन चाइना पॉलिसी’ नीति का उल्लंघन न करने की अपील की थी. इस पर बहुत बवाल हुआ. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय मीडिया (Media) आजाद है और हर मसले पर अपने तरह से रिपोर्ट करने को स्वतंत्र है. इसके बाद बीजेपी सहित कई पार्टियों के लोगों और आम लोगों ने ताइवान के राष्ट्रीय दिवस की शुभकामनाएं दी. बाद में ताइवान सरकार ने भारत के लोगों को शुभकामनाएं देने के लिए शुक्रिया कहा था.

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