चीन की अलीबाबा ई-कॉमर्स कंपनी ड्रग्स से जुड़ी जांच के निपटारे के लिए अमेरिका को 60 करोड़ डॉलर देगी

वॉशिंगटन, 2 जुलाई . चीन की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ग्रुप और अमेरिका में मौजूद उसकी पेमेंट प्रोसेसर कंपनी एयूएस मर्चेंट सर्विसेज, अमेरिकी न्याय विभाग के साथ अलग-अलग ‘नॉन-प्रॉसिक्यूशन एग्रीमेंट’ (मुकदमा न चलाने के समझौते) के तहत 600 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमत हो गई हैं. यह समझौता उन आरोपों को सुलझाने के लिए किया गया है, जिनमें कहा गया था कि वे अलीबाबा के ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए अमेरिका में गैर-कानूनी दवाओं और उनसे जुड़े उत्पादों की बिक्री और आयात को रोकने में नाकाम रहे.

इस समझौते में अलीबाबा द्वारा 125 मिलियन डॉलर का आपराधिक जुर्माना और 190 मिलियन डॉलर की जब्ती शामिल है, जबकि एयूएस मर्चेंट सर्विसेज 85 मिलियन डॉलर का आपराधिक जुर्माना भरेगी और 190 मिलियन डॉलर जब्त कराएगी. कुल मिलाकर, ये भुगतान 600 मिलियन डॉलर के हैं.

न्याय विभाग के अनुसार, अलीबाबा ने माना कि जनवरी 2016 और दिसंबर 2024 के बीच, वह अलीबाबा डॉट कॉम और अलीएक्सप्रेस का इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों को अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करके अमेरिका में दवाएं, लिस्टेड केमिकल और नकली दवाएं बनाने वाले उपकरण आयात करने से रोकने में नाकाम रही.

विभाग ने कहा कि उन लेन-देन का कुल सकल व्यापार मूल्य 200 मिलियन डॉलर से अधिक था. जांच के दौरान, संघीय एजेंटों ने ऐसी दवाओं और नकली सामान बनाने वाले उपकरणों की 40 से ज़्यादा गुप्त खरीदारी की, जिनका संयुक्त राज्य अमेरिका में आयात करना गैर-कानूनी था.

हालांकि अलीबाबा के पास ऐसे उत्पादों पर रोक लगाने वाली नीतियां थीं, लेकिन विभाग ने कहा कि कंपनी के कर्मचारियों ने चिंता जताई थी कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने वाले कंट्रोल अपर्याप्त थे. कुछ व्यापारियों ने गैर-कानूनी लेन-देन को आसान बनाने के लिए अलीबाबा की इंटरनल मैसेजिंग सर्विस का भी इस्तेमाल किया और कुछ मामलों में खरीदारों को एन्क्रिप्टेड थर्ड-पार्टी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भेज दिया.

कंपनी ने माना कि उसने कुछ मर्चेंट्स से मेंबरशिप, एडवरटाइजिंग, मार्केटिंग, शिपिंग और पेमेंट-प्रोसेसिंग फीस के जरिए कमाई की.

एयूएस मर्चेंट सर्विसेज ने माना कि जनवरी 2020 और दिसंबर 2023 के बीच, उसका एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कंप्लायंस प्रोग्राम कुछ अलीबाबा मर्चेंट्स को यूएस खरीदारों को प्रतिबंधित प्रोडक्ट्स बेचने के लिए उसकी पेमेंट प्रोसेसिंग सर्विसेज का इस्तेमाल करने से रोकने में नाकाम रहा.

कंपनी ने माना कि उसका ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम कुछ वायर-ट्रांसफर डेटा को शामिल करने में नाकाम रहा, जिसका मतलब है कि ज्यादा जोखिम वाले इलाकों से या कई पेयर्स (भुगतान करने वालों) से जुड़े कुछ पेमेंट्स की ठीक से पहचान नहीं हो पाई. कुछ मामलों में एयूएस द्वारा जांच करने और अलीबाबा को रिपोर्ट करने के बाद भी मर्चेंट्स ने प्रतिबंधित प्रोडक्ट्स बेचना जारी रखा.

न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा, “आज का फैसला डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की इस बात को पक्का करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है कि ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियां अपने मार्केटप्लेस से गैर-कानूनी, बिना मंजूरी वाली, गलत ब्रांडिंग वाली और खतरनाक विदेशी दवाओं को दूर रखें.”

क्रिमिनल डिवीजन के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल टाइसन डुवा ने कहा, “अगर नियमों का ठीक से पालन न किया जाए तो अपराधी गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने और उनसे मुनाफा कमाने के लिए ई-कॉमर्स साइट्स का इस्तेमाल करते हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि अलीबाबा और एयूएस ने अपनी स्क्रीनिंग और नियमों के पालन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया है और भविष्य में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ लगातार सहयोग करने का वादा किया है. नतीजतन, गैर-कानूनी दवाओं और उनसे जुड़े उपकरणों के लिए एक और रास्ता अब बंद हो गया है.

समझौतों के तहत, दोनों कंपनियों ने अपने अधिकारियों, निदेशकों, कर्मचारियों और एजेंटों के कामकाज के लिए जिम्मेदारी स्वीकार की. वे नियमों के पालन की व्यवस्था को मजबूत करने, लेन-देन की निगरानी को बेहतर बनाने और चल रही या भविष्य की जांच में अमेरिकी अधिकारियों के साथ सहयोग जारी रखने पर भी सहमहुए.

1999 में चीन में शुरू हुई अलीबाबा कंपनी अलीबाबा डॉट कॉम (दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस-टू-बिजनेस ऑनलाइन मार्केटप्लेस में से एक) और अलीएक्सप्रेस (एक ग्लोबल कंज्यूमर शॉपिंग प्लेटफॉर्म) चलाती है. यह कंपनी न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड है.

ओपी/डीकेपी