
बिलासपुर, 21 अगस्त . छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में Police की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने डीजीपी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.
कोर्ट ने सवाल उठाए कि जिस Police अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज कराई और जिसके आधार पर First Information Report हुई, उसी अधिकारी को मामले की जांच करने और चार्जशीट पेश करने की अनुमति कैसे दी गई. मामला बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में 2925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) गोलियों की बरामदगी से जुड़ा है.
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है, यह प्रकरण पारिवारिक विवाद के कारण महिला को फंसाने के लिए साजिश के तहत बनाया गया है. कोर्ट ने मामले में संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर, अगली सुनवाई में व्यक्तिगत या वकील के माध्यम से उपस्थित होने को कहा है. याचिका पर अगली सुनवाई 24 अगस्त काे होगी.
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कथित प्रतिबंधित दवाओं वाला पॉलीथिन बैग महिला को सीधे नहीं मिला था. करीब 14 वर्ष के एक नाबालिग बच्चे को पतंग उड़ाते समय यह बैग घर की छत पर मिला. बच्चे ने दवाओं के बारे में मोबाइल पर जानकारी जुटाने के बाद अपनी मां को बताया. परिवार का कहना है कि बैग को अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे के स्थान पर रख दिया गया था. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है, 14 वर्षीय बच्चे के खिलाफ कोई First Information Report नहीं होने के बावजूद उसे Police थाने ले जाकर 10 घंटे तक बैठाकर रखा गया.
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि दवाओं के स्रोत, बैग को छत पर रखने वाले व्यक्ति, संबंधित लोगों की भूमिका और महिला की गिरफ्तारी की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए. उन्होंने बच्चे का मोबाइल भी फोरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात कही है. कोर्ट ने डीजीपी को जांच अधिकारी शैलेंद्र सिंह के पिछले आचरण के संबंध में भी व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ विस्तार से जानकारी देने का निर्देश दिया है.
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एमएस/
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