
चेन्नई, 21 मई . विजय के Chief Minister पद संभालने के बाद से उनकी सख्त समयपालन की आदत ने तमिलनाडु सचिवालय की कार्यसंस्कृति को प्रभावित करना शुरू कर दिया है.
अधिकारियों के अनुसार, Chief Minister लगातार एक तय समय-सारिणी का पालन कर रहे हैं और सप्ताह के कार्यदिवसों में लगभग सुबह 9:45 से 10:00 बजे के बीच सचिवालय पहुंचते हैं. आमतौर पर शाम 4:30 से 5:00 बजे के बीच आधिकारिक कामकाज पूरा होने के बाद कार्यालय छोड़ते हैं.
Chief Minister की इस दिनचर्या के चलते प्रशासनिक विभागों ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं कि अधिकारी और कर्मचारी कार्यदिवस की शुरुआत से पहले ही कार्यालय में उपस्थित और सक्रिय रहें.
सबसे पहले जिन विभागों ने इस तरह के निर्देश औपचारिक रूप से जारी किए, उनमें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग शामिल है. अतिरिक्त मुख्य सचिव पीबी सरवन कुमार द्वारा जारी कार्यालय आदेश में कर्मचारियों को सुबह 9:50 बजे तक ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए, जबकि कार्यालय सहायकों को 9:30 बजे तक उपस्थित रहने को कहा गया. आदेश में उपस्थिति दर्ज करने की विस्तृत प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है.
इसके तहत उप सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे उपस्थिति रजिस्टर बंद कर 10:00 बजे से पहले उपस्थिति सारांश कार्यालय अनुभाग को सौंपें ताकि उसे संकलित कर अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्यालय तक भेजा जा सके.
आदेश में चेतावनी दी गई है कि इन नए नियमों का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
सचिवालय सूत्रों के अनुसार, इसी तरह के निर्देश अन्य विभागों में भी जारी किए जा रहे हैं, जो प्रशासनिक दक्षता और समयपालन सुधारने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है.
हालांकि, इन बदलावों को लेकर कुछ कर्मचारियों में चिंता भी जताई गई है. कइयों का कहना है कि कामराजर सलई और मरीना क्षेत्र से होकर आने-जाने वाले कर्मचारियों को Chief Minister के काफिले की आवाजाही के कारण सुबह के समय ट्रैफिक जाम और देरी का सामना करना पड़ रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, Chief Minister का काफिला आमतौर पर सुबह 9:30 से 9:45 बजे के बीच मरीना रोड क्षेत्र से गुजरता है, जो कई कर्मचारियों के कार्यालय पहुंचने के समय के साथ मेल खाता है.
कुछ कर्मचारियों ने यह भी बताया कि पहले के मुख्यमंत्रियों करुणानिधि, जयललिता और स्टालिन आमतौर पर बाद में कार्यालय पहुंचते थे, जिससे आवागमन अपेक्षाकृत आसान रहता था.
प्रशासन हालांकि इस नए समयपालन को शासन सुधार और कार्यस्थल अनुशासन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहा है.
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पीएम
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