
Lucknow, 2 जुलाई . प्रदेश में डबल इंजन Government बनने के बाद आमजन को सभी केंद्रीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है. वर्ष 2017 से पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि पिछली Governmentें Political कारणों से केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में रोड़े अटकाती थीं. इतना ही नहीं, कई योजनाओं के मिलते-जुलते नाम रखकर लोगों को बरगलाने की भी चेष्टा की जाती थी.
नतीजा यह कि उत्तर प्रदेश की जनता मोदी Government की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रहती थी. लेकिन, जैसे ही 2017 में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के Chief Minister के रूप में शपथ ली, केंद्र Government की योजनाओं पर लगे ताले खुल गए. इससे केंद्र व राज्य, दोनों Governmentों की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचा.
केंद्र Government ने देश के हर गरीब को पक्का मकान देने के संकल्प के साथ Prime Minister आवास योजना की शुरुआत की थी. हालांकि प्रदेश की पूर्ववर्ती Government ने इस योजना को उत्तर प्रदेश में गति देने के बजाय अपनी समाजवादी आवास योजना और लोहिया ग्रामीण आवास योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था. इसके बाद आरोप लगे कि पूर्ववर्ती Government ने केंद्र को लाभार्थियों की सूची भेजने और मैचिंग ग्रांट (राज्य का हिस्सा) जारी करने में ढिलाई बरती. स्थिति यह थी कि Prime Minister आवास योजना के तहत वर्ष 2014 से 2017 तक वह Government 50 हजार आवास भी नहीं बना पाई. बाद में योगी Government आने पर इस कार्य को ‘डबल इंजन’ की रफ्तार दी गई. योगी Government ने 9 वर्षों में 62 लाख से अधिक परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया है.
किसानों को सूखे, बाढ़ या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र ने 2016 में Prime Minister फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) लॉन्च की थी. इस योजना में राज्य Government की ओर से भी प्रीमियम का एक हिस्सा दिया जाना था और राज्य की एजेंसियों को सक्रिय भूमिका निभानी थी. हालांकि 2017 से पहले की Government की उदासीनता के कारण करीब 3 प्रतिशत किसानों का ही बीमा हो सका था, जिससे यूपी के किसान केंद्रीय मुआवजे से वंचित रह गए, वहीं उस समय के दौरान भाजपा शासित राज्यों में जहां 60-70 प्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिल चुका था. योगी Government में इस योजना के तहत पिछले 9 वर्षों में 79 लाख से अधिक कृषकों को 6,283 करोड़ रुपए से अधिक भुगतान किया जा चुका है.
2014 में शुरू हुआ स्वच्छ India मिशन पीएम मोदी के सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक था, जिसका उद्देश्य देश को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाना था. इस योजना के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए केंद्र से फंड जारी होना था, लेकिन इसके लिए राज्य को उपयोगिता प्रमाण पत्र देना था और अपनी हिस्सेदारी तय करनी थी. पूर्ववर्ती Government ने इस योजना के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन में रुचि नहीं दिखाई. वह इस योजना की ब्रांडिंग के खिलाफ थी, क्योंकि वह इसे भाजपा की योजना मानती थी. नतीजा यह हुआ कि 2014-2017 के बीच यूपी में शौचालय निर्माण की गति बेहद धीमी रही और राज्य ओडीएफ रैंकिंग में काफी पीछे छूट गया.
मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश का ग्रामीण स्वच्छता दायरा महज 35 प्रतिशत के आस-पास ही पहुंच पाया था. वहीं प्रदेश का एक भी जिला पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त घोषित नहीं हो सका था. दूसरी तरफ वर्ष 2017 के बाद योगी Government के आने पर अब तक प्रदेशभर में स्वच्छ India मिशन ग्रामीण के तहत 3.31 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है. इसके बाद स्वच्छ India मिशन (ग्रामीण) के तहत उत्तर प्रदेश 100 प्रतिशत ओडीएफ राज्य घोषित किया गया. वहीं 94 हजार से अधिक गांव ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के साथ ओडीएफ प्लस घोषित किए गए. यह सब 2017 में लगभग नामुमकिन लग रहा था.
पूर्व Government के कार्यकाल के दौरान बेहद कम संख्या में महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन (सिलेंडर व रेगुलेटर) मिले. इनमें भी लगभग 35-40 प्रतिशत परिवारों ने पहला सिलेंडर खत्म होने के बाद दूसरा सिलेंडर नहीं भरवाया, क्योंकि उस वक्त रिफिलिंग पर राज्य Government की तरफ से कोई अतिरिक्त वित्तीय मदद या सब्सिडी टॉप-अप नहीं मिलता था. दूसरी तरफ योगी Government और केंद्र Government ने मिलकर पिछले 9 वर्षों में प्रदेश की लगभग 1.86 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन का लाभ दिया. इसके साथ ही होली और दीपावली पर दो सिलिंडर मुफ्त रिफिल किए जा रहे हैं.
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एसके/
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