आरोपों से घिरी केंद्र सरकार, हंगामे की भेंट चढ़ सकता है संसद का मानसून सत्र: हन्नान मोल्लाह

New Delhi, 19 जुलाई . संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने राम मंदिर, विपक्षी दलों की स्थिति, संसद में संभावित गतिरोध और प्रस्तावित विधेयकों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अभी जैसी स्थिति देखने को मिल रही है, उससे लगता है कि मॉनसून सत्र ज्यादा नहीं चल पाएगा.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान संसद में चर्चा के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि सत्र किस तरह चलेगा. सत्र शुरू होने से पहले ही जिस तरह से सवाल उठ रहे हैं, उससे पता चलता है कि सत्र ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा. केंद्र Government पर भ्रष्टाचार, घोटालों, सांप्रदायिक राजनीति और लोकतंत्र विरोधी गतिविधियों के एक के बाद एक आरोप लग रहे हैं.

Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा राम मंदिर मुद्दे पर Prime Minister को पत्र लिखे जाने के सवाल पर हन्नान मोल्लाह ने कहा कि यह कोई नई मांग नहीं है. उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से इस मामले में पारदर्शिता और जांच की मांग करता रहा है.

मोल्लाह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की भूमिका नहीं हो सकती बल्कि इसमें प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोगों के मन में इस मुद्दे को लेकर सवाल हैं और इनका जवाब मिलना जरूरी है.

संसद में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और अन्य विपक्षी दलों को लेकर पूछे गए सवाल पर मोल्लाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने दावा किया कि Maharashtra, बिहार और अन्य राज्यों में विपक्षी दलों को तोड़ने की कोशिश की गई और अब पश्चिम बंगाल में भी ऐसी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं.

उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य ऐसे विधेयक पारित करना है, जिन्हें विपक्ष जनविरोधी, मजदूर-विरोधी और समाज को बांटने वाला मानता है. मोल्लाह ने आरोप लगाया कि इसके लिए Government को संसद में बहुमत की जरूरत है और विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश उसी रणनीति का हिस्सा है.

वंदे मातरम से जुड़े प्रस्तावित विधेयक पर उन्होंने कहा कि यह Government की नीति का हिस्सा है लेकिन उन्होंने इसे सांप्रदायिक और विभाजनकारी बताया. मोल्लाह ने कहा कि ऐसे कदम देश के संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि Government अलग-अलग विचारों को स्वीकार करने के बजाय अपने विचार थोपने की कोशिश कर रही है.

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