केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर कम करें पेट्रोल-डीजल पर टैक्स:गवर्नर दास


कीमतें सिर्फ लोगों ही नहीं मैन्युफैक्चरिंग तथा परिवहन लागत पर भी प्रभाव डालती हैं

नई दिल्ली (New Delhi) . पेट्रोल (Petrol) और डीजल की कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही. अब रिजर्व बैंक (Bank) ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि देशभर में पेट्रोल (Petrol) और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम जन पर तो पड़ता ही साथ ही इसका सीधा असर गाड़ियों के मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर भी पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पेट्रोल (Petrol) की बढ़ती कीमतें सिर्फ यात्रियों (Passengers) के लिए नहीं है जो कार और बाइक का इस्तेमाल करते हैं.

बल्कि बढ़ती कीमतें मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन और अन्य पहलुओं की लागत पर भी प्रभाव डालती हैं. हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि राज्यों और केंद्र पर ज्यादा-से-ज्यादा रेवेन्यू इकट्ठा करने का दबाव है क्योंकि देश और लोगों को कोविड संकट से बाहर लाने के लिए अधिक कैश की जरूरत है. इससे पहले भी आरबीआई (Reserve Bank of India) गवर्नर ने केन्द्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा था कि पेट्रोल-डीजल पर इन-डायरेक्ट टैक्स में कटौती की जाए ताकि पेट्रोल (Petrol) डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके.

शक्तिकांत दास ने कहा कि पेट्रोल (Petrol) और डीजल पर टैक्स में कमी के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने की जरूरत है क्योंकि पेट्रोल-डीजल पर दोनों इनडायरेक्ट टैक्स लगाते हैं. इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी तेल के बढ़ते दाम को धर्मसंकट बताते कहा था कि यह केन्द्र और राज्य सरकार (State government) दोनों का मामला है. दोनों को मिलकर फैसला लेना चाहिए. गौरतलब है कि वर्तमान में केंद्र सरकार (Central Government)प्रति लीटर पेट्रोल (Petrol) पर बेसिक एक्साइज, सरचार्ज, एग्री-इन्फ्रा सेस और रोड/इन्फ्रा सेस के नाम पर कुल 32.98 रुपये वसूलती है. डीज़ल के लिए यह 31.83 रुपये प्रति लीटर है.​ पिछले साल मार्च और मई में पेट्रोल (Petrol) पर 13 रुपये और डीज़ल पर 16 रुपये प्रति लीटर सरचार्ज बढ़ाया गया था.

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