
New Delhi, 20 जुलाई . केंद्र Government ने Monday को संसद में कहा कि मौजूदा समय में Government इक्विटी से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स हटाने को लेकर कोई विचार नहीं कर रही है.
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने Lok Sabha में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, “फिलहाल Government के पास रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स को खत्म करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.”
Union Minister ने आगे बताया कि व्यापक आर्थिक हालातों को ध्यान में रखते हुए सालाना बजट प्रक्रिया और कानूनी बदलावों के तहत टैक्स नीतियों (जिनमें कैपिटल गेन्स की दरें भी शामिल हैं) की समय-समय पर समीक्षा की जाती है.
इक्विटी लेनदेन पर एलटीसीजी से होने वाला टैक्स संग्रह असिसमेंट ईयर (एवाई) 2024-25 (वित्त वर्ष 2023-24 के लिए) में 72,249 करोड़ रुपए से बढ़कर एवाई 2025-26 (वित्त वर्ष 2024-25 के लिए) में 1,29,158 करोड़ रुपए हो गया. इन दो वर्षों के दौरान Government ने एलटीसीजी टैक्स के माध्यम से कुल 2.01 लाख करोड़ रुपए जुटाए.
लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर एलटीसीजी कर की दर 12.5 प्रतिशत निर्धारित है. यह कर केवल उस स्थिति में लागू होता है, जब किसी वित्त वर्ष में पूंजीगत लाभ 1.25 लाख रुपए से अधिक हो. यदि किसी एसेट को 12 महीने से अधिक समय तक रखा जाता है, तो उसे दीर्घकालिक पूंजीगत परिसंपत्ति माना जाता है.
इस सवाल के जवाब में कि क्या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को एलटीसीजी कर से छूट दी गई है, जबकि घरेलू और खुदरा निवेशक अब भी यह कर चुका रहे हैं, Union Minister ने स्पष्ट किया कि इक्विटी निवेश पर 12.5 प्रतिशत की एलटीसीजी टैक्स दर एफपीआई, घरेलू निवेशकों और खुदरा निवेशकों सभी के लिए समान है.
मंत्री ने कहा, “घरेलू और खुदरा निवेशकों के लिए एलटीसीजी पर 12.5 प्रतिशत की जो कर दर लागू है, वही इक्विटी निवेश के मामले में एफपीआई पर भी लागू होती है. हालांकि, आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से Government ने केवल सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई के निवेश पर कर व्यवस्था को तर्कसंगत बनाया है. इसके तहत ऐसे निवेशों से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ को आयकर से छूट दी गई है.”
इस वर्ष मई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि Government शेयर बाजार के निवेशकों द्वारा कर व्यवस्था को लेकर उठाई गई चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है, जिनमें एलटीसीजी और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी) टैक्स से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं.
हालांकि, उन्होंने कर दरों में किसी तरह की कटौती का कोई आश्वासन नहीं दिया था.
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एबीएस
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