
New Delhi, 5 मई . Prime Minister Narendra Modi की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने Tuesday को रेल मंत्रालय की लगभग 23,437 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दे दी. जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, उनमें नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन, गुंतकल-वाडी तीसरी और चौथी लाइन और बुरहवाल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं.
रेल लाइन की क्षमता में वृद्धि से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा. इसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी. इस बहु-ट्रैकिंग प्रस्ताव से परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में उल्लेखनीय सुधार होगा. ये परियोजनाएं Prime Minister Narendra Modi की नए India की परिकल्पना के अनुरूप हैं. इसका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है. इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी.
Madhya Pradesh, Rajasthan , उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के 19 जिलों में फैली इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर तक की वृद्धि होगी.
प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 4,161 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 83 लाख है.
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से महाकालेश्वर, रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान, कुनो राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम (श्री राघवेंद्र स्वामी मठ), श्री नेटिकंती अंजनेय स्वामी वारी मंदिर (कासापुरम), श्यामनाथ मंदिर, नैमिषारण्य (नीमसर) आदि सहित देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा.
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा और इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर, उर्वरक आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं. क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष लगभग 60 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी. रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में सहायता करेगी, तेल आयात (37 करोड़ लीटर) को कम करेगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (185 करोड़ किलोग्राम) को कम करेगा, जो 7 करोड़ पौधारोपण के बराबर है.
–
एमएस/
Skip to content