
New Delhi, 3 जुलाई . केंद्र Government ने Supreme Court कॉलेजियम की सिफारिश के बाद Friday को तीन न्यायिक अधिकारियों को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज के तौर पर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी.
कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि India के संविधान से मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए और India के मुख्य न्यायाधीश से सलाह-मशविरा करके, President ने सुनीता गंधम, अलापति गिरिधर और पुरुषोत्तम कुमार चिंतालापुडी को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया है.
मेघवाल ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में तीनों न्यायिक अधिकारियों के नाम बताते हुए कहा, “India के संविधान से मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए और India के मुख्य न्यायाधीश से सलाह-मशविरा करके, President इन न्यायिक अधिकारियों को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त करते हुए खुशी महसूस कर रहे हैं.”
Supreme Court कॉलेजियम ने 4 मई को हुई अपनी बैठक में इन तीन न्यायिक अधिकारियों को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.
कॉलेजियम ने एक बयान में कहा था, “Supreme Court कॉलेजियम ने 4 मई, 2026 को हुई अपनी बैठक में जिन न्यायिक अधिकारियों को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है उनमें सुनीता गंधम, अलापति गिरिधर, और पुरुषोत्तम कुमार चिंतालापुडी (सीएच. पुरुषोत्तम कुमार) हैं.”
हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति से जुड़े प्रक्रिया के ज्ञापन (एमओपी) के मुताबिक, नियुक्ति का प्रस्ताव संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा शुरू किया जाता है. अगर Chief Minister किसी नाम की सिफारिश करना चाहते हैं, तो उसे विचार के लिए मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाना चाहिए.
Chief Minister के परामर्श के आधार पर Governor अपनी सिफारिश और संबंधित दस्तावेज, प्रस्ताव प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री को भेजते हैं. इसके बाद, केंद्र Government इस प्रस्ताव को India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भेजने से पहले, उससे जुड़ी जानकारियों और पृष्ठभूमि की विस्तृत समीक्षा करती है. मुख्य न्यायाधीश इस सिफारिश को अंतिम रूप देने से पहले Supreme Court के दो सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों (कॉलेजियम) से विचार-विमर्श करते हैं.
इस विमर्श के बाद, मुख्य न्यायाधीश सामान्यतः चार सप्ताह के भीतर अपनी अंतिम संस्तुति केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री को भेजते हैं. President द्वारा नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, न्याय विभाग के सचिव मुख्य न्यायाधीश को इसकी सूचना देते हैं और इसकी एक प्रति Chief Minister को भी भेजी जाती है. अंततः, इस नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना India के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित की जाती है.
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एएसएच/एएस
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