
New Delhi, 29 अप्रैल . चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान बीते दिनों ब्रिटेन की आधिकारिक यात्रा पर थे. यह भारतीय सीडीएस की पहली आधिकारिक ब्रिटेन यात्रा थी. इस यात्रा को दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. रक्षा विशेषज्ञों ने इसे ब्रिटेन और India के बीच रक्षा सहयोग में एक अहम कदम बताया है.
19 से 21 अप्रैल की तीन दिवसीय इस यात्रा में जनरल चौहान ने ब्रिटेन के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें की. ब्रिटेन के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ एयर चीफ मार्शल सर रिचर्ड नाइटन ने यहां उनका स्वागत व मेजबानी की. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और भविष्य की सैन्य योजनाओं पर गहन चर्चा हुई.
इस यात्रा के दौरान जनरल चौहान ने ब्रिटेन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, मंत्रियों, शिक्षाविदों और थिंक टैंकों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की. इसके अलावा ब्रिटिश रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत हुई, जिसमें रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, रोजगार के अवसर सृजित करने और आर्थिक विकास को गति देने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया. दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा सहयोग न केवल सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि आर्थिक साझेदारी को भी बढ़ावा देता है.
जनरल चौहान ने इस दौरान प्रतिष्ठित रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज का भी दौरा किया. वहां उन्होंने ग्लोबल स्ट्रेटेजिक प्रोग्राम और पिनेकल कोर्स के अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों से मुलाकात की. ये कार्यक्रम भविष्य के वरिष्ठ सैन्य और सरकारी नेतृत्व को तैयार करने के लिए जाने जाते हैं. इस संवाद के जरिए India ने अपने रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक सुरक्षा पर विचार साझा किए.
गौरतलब है कि India और ब्रिटेन के बीच रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है. दोनों देशों के बीच 10 साल का रक्षा औद्योगिक रोडमैप पहले ही तैयार किया जा चुका है. यह रोडमैप भविष्य में सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है. एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय सैन्य प्रशिक्षक पहले से ही ब्रिटेन की तीनों अधिकारी प्रशिक्षण अकादमियों में तैनात हैं.
वहीं आने वाले समय में भारतीय वायुसेना के फ्लाइंग प्रशिक्षकों को ब्रिटेन के आरएएफ वैली में तैनात किया जाएगा. यह कदम दोनों देशों के बीच सैन्य प्रशिक्षण और आपसी समझ को और मजबूत करेगा. आज के जटिल वैश्विक सुरक्षा माहौल में India और ब्रिटेन के बीच यह बढ़ता रक्षा सहयोग बेहद अहम माना जा रहा है. दोनों देश मिलकर न केवल अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में भी महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
जनरल अनिल चौहान ने यूके के रक्षा राज्य मंत्री ल्यूक पोलार्ड से भी मुलाकात की. इस मुलाकात में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे. बैठक में आधुनिक युद्धों के बदलते स्वरूप, आधुनिक सैन्य चुनौतियों और सैन्य-से-सैन्य सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई. सीडीएस ने यहां इंडो-पैसिफिक मामलों की राज्य मंत्री सीमा मल्होत्रा के साथ भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की.
इस दौरान भारत-यूके साझेदारी, रक्षा औद्योगिक रोडमैप और प्रौद्योगिकी एवं सुरक्षा से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया. खासतौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए दोनों पक्षों ने समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई. बैठकों में साइबर, इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया.
इन महत्वपूर्ण मुलाकातों से पहले जनरल चौहान ने यूके में एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल सम्मेलन का नेतृत्व भी किया. इसमें कई प्रमुख अधिकारी, थिंक टैंक्स और विशेषज्ञों शामिल हुए. राउंडटेबल सम्मेलन का विषय ‘भारतीय सैन्य परिवर्तन: चुनौतियां और अवसर’ था. अपनी यात्रा के दौरान जनरल चौहान को औपचारिक ‘सेरेमोनियल स्टेप लाइन’ सम्मान दिया गया. उन्होंने यूके में India के उच्चायुक्त से भी मुलाकात की.
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जीसीबी/एएस
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