नीट पेपरलीक मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों की जांच में जुटी सीबीआई

New Delhi, 26 मई . सीबीआई नीट पेपर लीक मामले की जांच के दौरान अब इस केस में गिरफ्तार तीन आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच कर रही है.

जांच एजेंसी को शक है कि आरोपियों ने पेपर लीक रैकेट से कमाए गए पैसों से कई संपत्तियां खरीदी हैं. अधिकारियों के मुताबिक, सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यही आरोपी 2024 में सामने आए कथित नीट पेपर लीक मामले में भी शामिल थे.

एजेंसी दोनों मामलों के बीच संबंधों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या एक ही गिरोह लंबे समय से इस रैकेट को चला रहा था.

इस मामले में पुणे के कई प्रोफेसर भी जांच के दायरे में आ सकते हैं. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कुछ शिक्षकों से पूछताछ की जा सकती है और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है.

सीबीआई इस पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों की पहचान करने में जुटी है.

Monday को सीबीआई ने पुणे की बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे और फिजिक्स लेक्चरर मनीषा हवलदार से जुड़े ठिकानों पर फिर से छापेमारी की. जांच एजेंसी को उम्मीद है कि तलाशी अभियान और जब्त दस्तावेजों की जांच से मामले में अहम सुराग मिलेंगे.

फिलहाल सीबीआई इस पूरे नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और सहयोगियों की गहन जांच कर रही है.

इससे पहले Monday को Supreme Court ने केंद्र Government, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया.

यह नोटिस उन याचिकाओं पर जारी किया गया, जिनमें नीट-यूजी परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार और कथित 2026 पेपर लीक विवाद के बाद तुरंत कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने की मांग की गई है.

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अलोक अराधे की पीठ ने याचिकाओं की प्रतियां सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सौंपने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 29 मई, Friday को तय की.

सुनवाई के दौरान Supreme Court ने कहा कि नीट-यूजी 2024 विवाद और उसके बाद पूर्व इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के बावजूद परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर फिर से सवाल उठ रहे हैं.

न्यायमूर्ति नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, ”यह दुखद है कि उन्होंने इससे कोई सबक नहीं लिया.”

Supreme Court ने याद दिलाया कि 2024 विवाद के बाद एक समिति बनाई गई थी, जिसकी सिफारिशें स्वीकार की गई थीं और निगरानी तंत्र भी लागू किया गया था.

इसी संदर्भ में अदालत ने एनटीए को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें 14 नवंबर 2024 को गठित निगरानी समिति की सिफारिशों के पालन की वर्तमान स्थिति और उसके कामकाज का विवरण दिया जाए.

अदालत ने प्रोफेसर के. राधाकृष्णन से भी अलग हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें यह बताया जाए कि समिति की सिफारिशों और Supreme Court के निर्देशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.

ये निर्देश फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिए गए, जिनमें नीट-यूजी परीक्षा के संचालन में जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग की गई है.

एएमटी/पीएम