सीबीआई ने 2002 के गढ़वा किले में मूर्ति चोरी और हत्या के मामले में फरार आरोपी को गिरफ्तार किया

New Delhi, 5 जुलाई . सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने 4 जुलाई को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के खाखेरू Police स्टेशन के तहत आने वाले नसीरपुर गांव से रामनारायण उर्फ हैदर नाम के एक फरार आरोपी को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी 2002 के एक मामले के सिलसिले में की गई है, जिसमें प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की संरक्षित साइट, गढ़वा किले से एक प्राचीन मूर्ति की चोरी और डकैती के दौरान हत्या का मामला शामिल था.

सीबीआई ने यह मामला 9 सितंबर 2003 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) जिले के शंकरगढ़ Police स्टेशन से अपने हाथ में लेने के बाद दर्ज किया था. मूल रूप से यह मामला वहां भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 396 और 201 के तहत अपराध संख्या 43/2002 के रूप में दर्ज किया गया था.

आरोप है कि 21-22 अप्रैल 2002 की रात को आरोपी विजय कुमार शुक्ला की अगुवाई में 11 लोगों के एक गिरोह ने संरक्षित गढ़वा किले में डकैती की. इस घटना के दौरान, गिरोह ने कथित तौर पर चौकीदार विनोद कुमार श्रीवास्तव की पिटाई की और उसका मुंह बंद करके उसकी हत्या कर दी, दूसरे चौकीदार को काबू में किया, स्टोर रूम का ताला तोड़ा और भगवान बुद्ध की पत्थर की एक कीमती मूर्ति चुरा ली, जो निकालते समय दो टुकड़ों में टूट गई.

जांच से पता चला कि मूर्ति के चोरी हुए टुकड़ों को कथित तौर पर एक गाड़ी में ले जाया गया और आरोपी विजय कुमार शुक्ला ने उन्हें दो लोगों को 2.20 लाख रुपए में बेच दिया. इसके बाद मूर्ति को दिल्ली के महिपालपुर स्थित एक गोदाम में ले जाया गया और कथित तौर पर विदेश भेज दिया गया. जांच के बाद सीबीआई ने 22 दिसंबर 2005 को दस आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. ​​इनमें वे चार आरोपी भी शामिल थे जो फरार चल रहे थे – विजय कुमार शुक्ला, रवि करण, सूरज भान और रामनारायण उर्फ हैदर.

फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए सीबीआई ने खास टीमें बनाईं, जिन्होंने लोकल इंटेलिजेंस जुटाई, मुखबिर बनाए और लगातार निगरानी व फॉलो-अप ऑपरेशन चलाए. इन लगातार कोशिशों के नतीजे में, फरार आरोपी सूरज भान और रवि करण को क्रमशः 22 मई 2026 और 2 जून 2026 को पकड़ा गया, जबकि फरार आरोपी विजय कुमार शुक्ला का पता चित्रकूट जिला जेल में चला, जहां वह उत्तर प्रदेश Police के एक दूसरे मामले में बंद है. इस मामले में उसे पेश कराने के लिए Lucknow की सक्षम अदालत में जरूरी कार्रवाई पहले ही 16 जून 2026 को शुरू कर दी गई है. राम नारायण उर्फ हैदर की गिरफ्तारी के साथ ही, इस मामले के सभी फरार आरोपियों का पता चल गया है. अब उन पर कानून के मुताबिक मुकदमा चलेगा.

एमएस/