
New Delhi, 14 जुलाई . पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एस.वाई. कुरैशी ने कहा है कि वर्ष 2010 में चुनाव आयोग का कार्यभार संभालने के बाद उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक चुनावों में धनबल के प्रभाव पर रोक लगाना था. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन के इस्तेमाल के 40 अलग-अलग तरीके चिह्नित किए थे और कार्रवाई के दौरान पहले करोड़ों तथा बाद में सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई.
को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कुरैशी ने बताया कि चुनावों के दौरान मतदाताओं तक नकदी पहुंचाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जाते थे. इनमें शादी और जन्मदिन की पार्टियों की आड़ लेना भी शामिल था, ताकि चुनाव आयोग की निगरानी से बचा जा सके.
जब उनसे पूछा गया कि क्या यूपीए Government के कार्यकाल में चुनावों के दौरान धनबल का व्यापक इस्तेमाल होता था, तो उन्होंने कहा, “यह गंभीर सवाल है, क्योंकि 2010 में मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद मैंने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद के सामने दो बड़ी चुनौतियां रखी थीं. पहली थी शिक्षित शहरी मतदाताओं की मतदान के प्रति उदासीनता और दूसरी थी चुनावों में धनबल का इस्तेमाल.”
कुरैशी ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने दो अलग-अलग प्रभाग (डिवीजन) बनाए. उन्होंने कहा, “हमने एक समाधान निकाला. चुनाव आयोग में दो अलग-अलग डिवीजन बनाए गए. पहला मतदाता जागरूकता के लिए था, जिसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से एक पेशेवर अधिकारी को लाकर पहला महानिदेशक बनाया गया.”
उन्होंने आगे कहा, “धनबल पर निगरानी के लिए हमने ‘व्यय निगरानी प्रभाग’ बनाया. इसके लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में कार्यरत आयकर सेवा के एक अधिकारी को महानिदेशक नियुक्त किया गया. उन्होंने नियम और दिशानिर्देश तैयार किए. हमने उनका व्यापक प्रचार किया और Political दलों को प्रशिक्षण भी दिया, ताकि वे अनजाने में गलती न करें. हमारा उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से अधिक रोकथाम पर था.”
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के बाद चुनाव आयोग को शुरुआती दौर में काफी सफलता मिली और चुनावों के दौरान मतदाताओं में बांटने के लिए लाई जा रही बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई.
उन्होंने कहा, “शुरुआत में हमें काफी सफलता मिली. पहले करोड़ों रुपये और बाद में सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई. मैंने अपनी पहली पुस्तक ‘एन अनडॉक्यूमेंटेड वंडर: द मेकिंग ऑफ द ग्रेट इंडियन इलेक्शन’ में भी उल्लेख किया है कि हमने धनबल के दुरुपयोग के 40 अलग-अलग तौर-तरीकों (मोडस ऑपरेंडी) की पहचान की थी.”
कुरैशी ने बताया कि चुनावों में धन बांटने के लिए कई अनोखे तरीके अपनाए जाते थे. उन्होंने कहा, “अखबार खोलते ही उसमें से नकदी निकल आती थी. कई जगह घर-घर जाकर पैसे पहुंचाए जाते थे. कहीं सोने की चेन रख दी जाती थी, तो कहीं मतदाताओं को दावत देने के लिए फर्जी शादी और जन्मदिन की पार्टियों का आयोजन किया जाता था.”
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने धनबल के इस्तेमाल के कई तरीकों का खुलासा किया था, लेकिन समय के साथ नए तरीके भी सामने आए होंगे.
कुरैशी ने कहा, “हमने कई तरह के तौर-तरीकों का पता लगाया था, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि समय के साथ नए तरीके भी विकसित हुए होंगे. इसलिए मैं यह नहीं कहूंगा कि हम इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पा सके, जैसा हम चाहते थे.”
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डीएससी
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