
Ahmedabad, 26 मई . Ahmedabad नगर निगम (एएमसी) ने मानसून आने के पहले पूरे शहर में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया है. अधिकारियों के अनुसार, कड़ी निगरानी, फॉगिंग और लार्वा-रोधी अभियानों के चलते इस साल डेंगू के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
एएमसी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शहर में जनवरी से मई के बीच डेंगू के 110 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 2025 में 1,591 मामले दर्ज किए गए थे. इस साल रिपोर्ट किए गए डेंगू के मामलों में से 104 सरकारी अस्पतालों में और छह निजी अस्पतालों में पाए गए.
Ahmedabad में इस साल अब तक मलेरिया (पीवी ) के 54 और मलेरिया (पीएफ) के 11 मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं, जबकि 2025 में मलेरिया (पीवी) के 784 और मलेरिया (पीएफ) के 177 मामले दर्ज किए गए थे. एएमएसी ने बताया कि लगातार निगरानी के कारण मलेरिया के मामलों में कमी आई है.
नागरिक निकाय ने कहा कि पिछले साल की तुलना में लगातार देखरेख और निगरानी के परिणामस्वरूप मामलों में गिरावट आई है.
मानसून पूर्व कार्य योजना के तहत, निगम ने पूरे शहर में 274 चालू फॉगिंग मशीनें और लगभग 2,000 कर्मचारियों को तैनात किया है, जिसमें उच्च जोखिम वाले और हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है.
जनवरी से एएमसी की टीमों ने मच्छर पनपने के 577 स्थानों की पहचान की है और रुके हुए पानी वाले 88 निर्माण स्थलों को नोटिस जारी किया है या जुर्माना लगाया गया है.
निगम ने बताया कि इस साल अब तक डेंगू और मलेरिया की निगरानी के लिए 6.53 लाख से अधिक रक्त के नमूने एकत्र किए गए हैं, जबकि 2025 में 17,65,047 नमूने एकत्र किए गए थे.
एएमसी ने स्पष्ट किया कि डेंगू पॉजिटिविटी दर उन लोगों का प्रतिशत है जिनका डेंगू परीक्षण किया गया और वे पॉजिटिव पाए गए, जबकि मलेरिया स्लाइड पॉजिटिविटी दर उन रक्त स्लाइड्स का प्रतिशत दर्शाती है जिनमें मलेरिया के परजीवी पाए गए.
इस अभियान के तहत पूरे शहर से छोड़े गए टायर, कबाड़ सामग्री और पानी जमा करने वाले कचरे को हटाया जा रहा है. साथ ही मच्छरों के पनपने से रोकने के लिए झीलों और जल निकायों से वनस्पति और कचरे को भी साफ किया जा रहा है.
सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों में गहन निरीक्षण किए जा रहे हैं.
अधिकारियों ने कहा कि इन सुविधाओं पर नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया था ताकि वेक्टर नियंत्रण से संबंधित नागरिक उपनियमों का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके.
निगम ने दैनिक निगरानी के लिए शहर को वार्ड-वार और जोन-वार छोटे परिचालन अनुभागों में विभाजित किया है और उन क्षेत्रों के लिए अलग से मैपिंग तैयार की गई है जहां मच्छरों के पनपने की गतिविधि अधिक पाई गई है. कैचपिट और ड्रेनेज सिस्टम की निगरानी की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे कूड़े और रुके हुए पानी से मुक्त रहें, साथ ही नियमित रूप से कीटनाशक का छिड़काव भी किया जा रहा है.
नागरिक निकाय ने कहा कि लार्वा-रोधी अभियान और फॉगिंग अभियान पूरे साल चलाए जाते हैं और मॉनसून के दौरान इन्हें और तेज कर दिया जाता है.
निर्माण स्थलों, खाली प्लॉटों और रुके हुए पानी वाली जगहों की हर पखवाड़े एक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए निगरानी की जा रही है.
झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में, मलेरिया विभाग की टीमें और शहरी स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी नियमित रूप से बुखार की निगरानी और लार्वा-रोधी उपचार कर रहे हैं, जबकि हॉटस्पॉट इलाकों में हर पखवाड़े घर-घर जाकर जांच की जा रही है.
जमीनी स्तर के अभियानों को बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मलेरिया कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता संभाल रहे हैं, जो मच्छरों पर नियंत्रण, लार्वा-रोधी उपचार, बुखार की निगरानी, जागरूकता अभियान और मलेरिया के पूर्ण उपचार के लिए घरों का दौरा कर रहे हैं.
एएमसी ने बताया कि डेंगू और मलेरिया के निदान और उपचार की सुविधाएं शहरभर के सभी शहरी स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी औषधालयों में उपलब्ध हैं.
एएमसी ने कहा कि फिलहाल किसी भी तरह के प्रकोप की स्थिति दर्ज नहीं की गई है, हालांकि ऐसी परिस्थितियों के लिए टीमों को तैयार रखा गया है. प्रभावित इलाकों में बुखार के सर्वेक्षण और संपर्क ट्रेसिंग का काम भी किया जा रहा है.
इस बीच, राजकोट नगर निगम (आरएमसी) ने बताया कि उसने 18 मई से 24 मई के बीच मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के अपने अभियान को और तेज कर दिया है.
इस दौरान नागरिक निकाय ने 18,261 घरों में लार्वा-रोधी अभियान और 171 घरों में फॉगिंग अभियान चलाए.
राजकोट के नागरिक अधिकारियों ने बताया कि जिन इलाकों में मच्छरों की संख्या ज्यादा थी, वहां वाहनों पर लगी फॉगिंग मशीनों को तैनात किया गया, जिनमें संवेदनशील आवासीय सोसाइटियां, सार्वजनिक सड़कें और भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल हैं.
निगम ने मच्छरों के पनपने की जांच के लिए 421 गैर-आवासीय परिसरों का भी निरीक्षण किया, जिनमें निर्माण स्थल, स्कूल, अस्पताल, होटल, उद्योग, छात्रावास, कबाड़खाने, धार्मिक स्थल, पेट्रोल पंप और सरकारी कार्यालय शामिल हैं.
उप-नियमों के पालन के तहत 146 आवासीय और 43 व्यावसायिक इकाइयों को नोटिस जारी किए गए, जहां मच्छरों के पनपने के प्रमाण मिले थे. 18 मई से 24 मई के सप्ताह के दौरान राजकोट में डेंगू का एक मामला सामने आया, जबकि मलेरिया या चिकनगुनिया का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया.
जनवरी से अब तक शहर में मलेरिया के तीन मामले, डेंगू के 15 मामले और चिकनगुनिया का एक मामला दर्ज किया गया है.
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डीकेएम/
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