सिंधिया की मांग पर फंसा हुआ है कैबिनेट का पेंच · Indias News

सिंधिया की मांग पर फंसा हुआ है कैबिनेट का पेंच

नई दिल्‍ली . मध्य प्रदेश में कैबिनेट विस्तार के लिए मंत्रियों की सूची पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व फैसला नहीं ले सका. दो दिन से दिल्‍ली में डेरा डाले शिवराज सिंह चौहान को सोमवार शाम भोपाल लौटना था, मगर सूची पर अंतिम फैसला न होने के कारण वे मंगलवार शाम तक दिल्‍ली में ही रहे.

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सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व के स्तर से सूची फाइनल होने के बाद राज्य में अब गुरुवार को ही मंत्रि परिषद का विस्तार हो सकेगा. सूची पर पेंच फंसने पर गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर भी देर शाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ बैठक हुई. इससे पहले शाम चार बजे चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बाद में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ भेंट की थी.

सूत्रों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कुल 11 मंत्री चाहते हैं. सिंधिया के दो करीबी विधायक गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिंह सिलावट मार्च में ही मंत्री बन चुके हैं. विधानसभा में सदस्यों की संख्या के हिसाब से राज्य में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं. इनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. इस तरह मुख्यमंत्री अधिकतम 29 और मंत्री बना सकते हैं.

ऐसे में वह कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस से भाजपा में आए नौ और नेताओं को मंत्री बनवाना चाहते हैं. इतना ही नहीं सिंधिया ने मंत्री पद के दावेदार नेताओं के नामों के साथ उनकी पसंद के विभागों की सूची भी भेज दी है.

सिंधिया के करीबियों के मुताबिक, कमलनाथ सरकार में ही उनके खेमे के छह मंत्री बने थे. ऐसे में भाजपा में आने से पहले ही सिंधिया ने बता दिया था कि उनके साथ आने वाले कम से कम 10 से 11 विधायकों को मंत्री पद चाहिए.

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी सिंधिया गुट को 10 से 11 मंत्री पद देने के लिए तैयार है, मगर मनपसंद विभाग देने को राजी नहीं है. इसको लेकर दोनों तरफ से पेंच फंसा है. सिंधिया ने पूराने समझौते के अनुसार सिलावट के लिए डिप्‍टी सीएम का पद मांगा है.

सूत्रों का यह भी कहना है सिलावट के डिप्‍टी सीएम बनने पर नरोत्तम मिश्रा को भी डिप्‍टी सीएम बनाया जाएगा. हालांकि गृह और स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल रहे नरोत्तम मिश्रा जनसंपर्क मंत्रालय भी चाहते हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें मना कर दिया. पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा से कहा है कि वह अधिकतम दो विभाग ही अपने पास रख सकते हैं.

राज्य में मार्च महीने में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ. वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में आए. उनके समर्थन में 22 विधायकों ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को 20 मार्च को पद से इस्तीफा देना पड़ा. 23 मार्च को शिवराज ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. अप्रैल में 5 मंत्रियों को शपथ दिलाकर मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल का गठन किया. इन 5 में से 2 मंत्री सिंधिया खेमे से हैं.


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