
Lucknow, 30 जुलाई . उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने पार्टी की रणनीति, आकाश आनंद की भूमिका, Samajwadi Party की प्रस्तावित पीडीए रथ यात्रा, गठबंधन की संभावनाओं समेत कई अहम मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि बसपा आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी और पार्टी का गठबंधन किसी Political दल से नहीं, बल्कि जनता से होगा.
बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में अहम भूमिका मिलने की चर्चाओं पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि अंतिम निर्णय हमेशा पार्टी प्रमुख मायावती ही करती हैं. उन्होंने कहा कि प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया पार्टी के को-ऑर्डिनेटरों से शुरू होती है, जो अपने क्षेत्रों से मजबूत और टिकाऊ उम्मीदवारों का फीडबैक जुटाते हैं. यह पूरी रिपोर्ट मायावती के पास जाती है और अंतिम फैसला वही करती हैं. विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति लगातार हो रही है. शाहाबाद और जेवर सीट को लेकर भी आकाश आनंद को प्रभारी बनाए जाने की चर्चा है, जो मायावती की अनुमति के बाद घोषित की जा सकती है.
विश्वनाथ पाल ने कहा कि बसपा का संगठनात्मक अभियान पहले से ही जारी है. जिन नेताओं और प्रभारीयों की नियुक्ति की जा रही है, वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर संगठन को मजबूत करने का काम कर रहे हैं.
जब उनसे पूछा गया कि क्या आकाश आनंद युवा चेहरे के रूप में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के सामने चुनौती बनेंगे, तो उन्होंने इस तुलना को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि मीडिया बार-बार आजाद समाज पार्टी को बसपा के साथ जोड़ने की कोशिश करता है, जबकि उसका कोई औचित्य नहीं है. वे राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं. घोसी-मऊ चुनाव में उनका प्रदर्शन सबने देखा है. पहले उनका वोट प्रतिशत देख लीजिए, फिर तुलना कीजिए. मैं उनके बारे में कुछ नहीं कहना चाहता.
विधानसभा चुनाव में गठबंधन की संभावनाओं पर विश्वनाथ पाल ने दो टूक कहा कि बसपा किसी भी Political दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि हमारी नेता बहन मायावती ने साफ कहा है कि हम अकेले चुनाव लड़ेंगे. हमारा गठबंधन जनता से होगा, किसी दल से नहीं.
पेपर लीक संशोधन विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्वनाथ पाल ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं बिल्कुल नहीं होनी चाहिए और उत्तर प्रदेश में यह कई बार हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि बसपा इस मुद्दे को लंबे समय से उठा रही है. आज छात्र धरना दे रहे हैं, लेकिन हमारे राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद 2024 के चुनाव से पहले से ही इस मुद्दे को उठा रहे थे. जब कोई इसके खिलाफ नहीं बोल रहा था, तब भी बसपा इसका विरोध कर रही थी. यह पूरी तरह गलत है और इसे बंद होना चाहिए.
‘वंदे मातरम’ विधेयक पर विश्वनाथ पाल ने टिपप्णी करने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय मुद्दा है. मैं प्रदेश अध्यक्ष हूँ. इस विषय पर जो भी आधिकारिक प्रतिक्रिया होगी, वह बहन जी देंगी.
2027 चुनाव की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि बसपा 2007 के चुनावी मॉडल पर ही काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम समाज और अन्य वर्गों के भाईचारा सम्मेलन लगातार आयोजित किए जा रहे हैं और पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने में जुटा है. 2007 में बिना किसी Political दल के गठबंधन के हमने जनता का गठबंधन बनाकर Government बनाई थी. उसी रणनीति पर आज भी काम हो रहा है. हमें पूरा विश्वास है कि 2007 का इतिहास दोहराया जाएगा.
Samajwadi Party की प्रस्तावित पीडीए रथ यात्रा पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि केवल बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की बात करना गलत है. बसपा का वोट बैंक पूरी तरह जागरूक है और किसी Political अभियान से प्रभावित होने वाला नहीं है. बसपा का वोट इतना नादान नहीं है कि किसी के नाटक से इधर-उधर चला जाएगा. उल्टा Samajwadi Party और भाजपा के वोट भी बसपा की ओर आ रहे हैं क्योंकि जनता तीनों Governmentों की तुलना कर रही है.
उन्होंने दावा किया कि मायावती Government के दौरान उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था सबसे बेहतर थी. शिक्षा, किसानों और व्यापारियों के हित में सबसे अधिक काम बसपा Government ने किए थे. उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, मेडिकल और पैरामेडिकल संस्थानों की स्थापना तथा किसानों को दी गई सुविधाओं का भी उल्लेख किया.
Samajwadi Party के पीडीए अभियान पर तीखा हमला बोलते हुए विश्वनाथ पाल ने कहा कि पीडीए का वास्तविक अर्थ ‘परिवार दल अलायंस’ है. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि Samajwadi Party वास्तव में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के हित में काम करना चाहती, तो सत्ता में रहते हुए एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की बैकलॉग भर्तियां नहीं रोकती. मायावती Government ने सभी वर्गों को सरकारी नौकरियां दीं, अधिकारियों को पदोन्नति दी और महापुरुषों के सम्मान में जिलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और संस्थानों का निर्माण कराया, जबकि बाद की Governmentों ने उनके नाम बदलकर उनका अपमान किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि Samajwadi Party की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है. चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं, लेकिन जब पार्टी सत्ता में थी तब उसने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के हितों की अनदेखी की. पाल ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब तीनों Governmentों, बसपा, Samajwadi Party और भाजपा, के कामकाज की तुलना कर रही है और उन्हें विश्वास है कि इस बार सभी वर्गों का समर्थन बसपा को मिलेगा तथा पार्टी एक बार फिर प्रदेश में Government बनाने में सफल होगी.
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