विचार-मंथन / बेहद घातक संक्रमण

(लेखक/सिद्धार्थ शंकर/ )
कोरोना (Corona virus) की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है. गुरुवार (Thursday) को पहली बार इसने एक दिन में दो लाख संक्रमण का आंकड़ा पार कर लिया. यह इससे एक दिन पहले के मुकाबले 9 फीसदी अधिक था. इस दौर 1184 मरीजों की मौत हुई जो पिछले साल सितंबर के बाद सबसे ज्यादा है. इसी बीच देश में सक्रिय मरीजों की संख्या 15 लाख पहुंच गई. इस महीने सक्रिय मरीजों की संख्या ढाई गुना (guna) तक बढ़ गई है. 31 मार्च को यह 6 लाख थी. ज्यादा सक्रिय मामलों का अर्थ है कि इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ेगा और मौतों की संख्या में भी तेजी आएगी. गुरुवार (Thursday) को 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अब तक के सबसे अधिक कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए. कोरोना (Corona virus) की भयावह रफ्तार के चलते अब तक 16 राज्यों में हालात बिगड़ चुके हैं. वहीं, कोरोना ने लगातार तीसरे दिन देश में एक हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली. दूसरी बार एक दिन में दो लाख से ज्यादा लोग कोरोना (Corona virus) की चपेट में आए. पिछले वर्ष 30 जनवरी को देश में पहला संक्रमित मरीज मिला था. तब से लेकर अब तक एक दिन में सबसे अधिक मामले मिलने का यह नया रिकॉर्ड है. सिर्फ नौ दिन में प्रतिदिन मिलने वाले मामले एक से बढ़कर दो लाख हो गए. वहीं, अमेरिका में इतने ही मामले होने में 21 दिन लगे थे. संक्रमित मरीजों की संख्या बढऩे से ठीक होने की दर घटती जा रही है. देश में अभी 88.31 फीसदी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि करीब 15 लाख सक्रिय मरीजों का इलाज चल रहा है. देश में कोरोना की सक्रिय दर 10.46 फीसदी तक पहुंच चुकी है, जो इससे पहले कभी देखने को नहीं मिली. इसके अलावा देश में पहली बार एक दिन में 1.06 लाख सक्रिय केस बढ़े हैं. कोरोना से निपटने के लिए कई राज्यों ने जो सख्त प्रतिबंध लगाए हैं, उन्हें और नहीं टाला जा सकता था. इस सख्ती का फौरी मकसद यही है कि लोग घरों से न निकलें और संक्रमण की शृंखला को तोड़ा जा सके. ऐसी सख्ती पहले ही लागू हो जाती तो हालात बेकाबू होने से बच जाते. पर विशेषज्ञों की चेतावनियों को जिस तरह नजरअंदाज किया जाता रहा, उसी का नतीजा आज हम भुगत रहे हैं. भारत अब कोरोना की सबसे तगड़ी मार झेलने वाला दुनिया का पहला देश हो गया है. चौंकाने वाला आंकड़ा यह भी है कि अब दुनिया में हर दस में चौथा मरीज अपने यहां का है. देश के तमाम शहरों के अस्पतालों और श्मशानों से आ रही तस्वीरें हालात की भयावहता बता रही हैं. उधर विशेषज्ञ चेता रहे हैं कि महामारी (Epidemic) का सिलसिला थमने के फिलहाल कोई आसार नहीं हैं. संक्रमितों का आंकड़ा रोजाना पंद्रह से बीस हजार की दर से बढ़ रहा है. जाहिर है, एक दिन में संक्रमितों का आंकड़ा तीन लाख पहुंचने में कोई ज्यादा वक्त नहीं रह गया है. गौर करने की बात यह है कि अस्पतालों में बिस्तरों और दवाइयों की कमी अभी से होने लगी है. रेमडेसिविर के इंजेक्शन से लेकर आक्सीजन के सिलेंडर कम पड़ जाने से सबका दम फूल रहा है. यह संकट की घड़ी है. इसमें हम जितनी सूझबूझ और संयम से काम लेंगे, उतनी जल्दी संकट से बाहर आ सकेंगे. ऐसी आपदओं से देशों की अर्थव्यवस्थाएं पटरी से उतर जाती हैं. आमजन की माली हालत खराब हो जाती है. व्यापार बैठ जाते हैं. पिछले एक साल से हम यह देख भी रहे हैं. बहरहाल आज जिस तरह के हालात हैं, उसी में जीना भी है और कोरोना को भी हराना है.

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