
सिंगापुर, 30 मई . मिसाइल बनाने में India की बढ़ती विशेषज्ञता और बढ़ती पहुंच पर जोर देते हुए, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने Saturday को बताया कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील पर हस्ताक्षर हो चुका है. इसके अलावा, इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही एक और एग्रीमेंट अभी आखिरी चरण में है.
सिंगापुर में शांगरी ला डायलॉग के दौरान एक मीडिया इवेंट के दौरान वियतनामी डेलीगेट के सवाल का जवाब देते हुए रक्षा सचिव सिंह ने कहा, “मेरी समझ से इंडोनेशिया और वियतनाम दोनों के साथ समझौता फाइनल स्टेज में है. असल में, वियतनाम के लिए, मुझे लगता है कि इस पर पहले ही साइन हो चुका है, शायद सार्वजनिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन इस पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुका है. जाहिर है, आप उन फ्रेंडली विदेशी देशों की कैटेगरी में हैं जिनके साथ हमें इस तरह की उच्च तकनीक साझा करने में खुशी होगी.”
India और रूस द्वारा मिलकर बनाई गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का पहला खरीदार फिलीपींस हैं. ऐसे में रक्षा सचिव सिंह ने कहा कि India का आसियान देशों के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता है. उन्होंने सिंगापुर में कहा, “हम आप सभी को मित्र देश मानते हैं जिनके साथ हम एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी शेयर कर सकते हैं.”
फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलों का पहला बैच 2024 में मिला, जिससे वह India का पहला कस्टमर बन गया, जबकि India ने मिसाइलों का दूसरा बैच अप्रैल 2025 में डिलीवर किया.
इस महीने की शुरुआत में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हनोई गए थे, जहां उन्होंने अपने वियतनामी समकक्ष जनरल फान वान गियांग के साथ दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी और समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर विस्तार में बातचीत की.
सिंह के दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे हो गए, जिसे इस महीने की शुरुआत में वियतनाम के President टो लाम के स्टेट दौरे के दौरान अपग्रेड करके उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी कर दिया गया था.
अपने दौरे के दौरान, उन्होंने वियतनाम के President से भी मुलाकात की और दोनों देशों के बीच उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग को मजबूत करने के India की प्रतिबद्धता को फिर से कन्फर्म किया.
मीटिंग के बाद social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्री ने लिखा, “India और वियतनाम के बीच आपसी भरोसे, साझा मूल्यों और रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में करीबी सहयोग पर आधारित एक मजबूत संबंध है.”
रक्षा मंत्री सिंह ने भरोसा जताया है कि 2030 तक India का रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे रक्षा बाजार बढ़ रहा है, New Delhi उन इलाकों में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है जो उसके भू-Political और रणनीतिक हितों से मेल खाते हैं और ग्लोबल साउथ उसके रणनीतिक नजरिए का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है.
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डीएससी
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