उत्तर प्रदेश: विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की नई रणनीति, सबसे ज्यादा ओबीसी पर दांव

Lucknow, 25 जून . उत्तर प्रदेश भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देते हुए Thursday को नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की अगुवाई में गठित नई टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ-साथ कई ऐसे चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनकी नियुक्ति Political हलकों में चर्चा का विषय बन गई है.

संगठन ने इस बार ओबीसी नेतृत्व को प्राथमिकता देते हुए अपने चुनावी सामाजिक समीकरणों को और स्पष्ट किया है. नई कार्यकारिणी में सबसे अधिक चर्चा Samajwadi Party छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं विधायक पूजा पाल और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने की रही.

वहीं, प्रतापगढ़ के युवा नेता रोहित मिश्रा को भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर पार्टी ने युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है. भाजपा ने इस बार अपने संगठनात्मक ढांचे में पिछड़े वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व देकर यह संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उसकी रणनीति का केंद्र ओबीसी, दलित और महिला मतदाता होंगे. इसके विपरीत ब्राह्मण और ठाकुर वर्ग के प्रतिनिधित्व में मामूली कटौती देखने को मिली है.

नई टीम में 19 प्रदेश उपाध्यक्ष, 19 प्रदेश मंत्री, 8 प्रदेश महामंत्री, 6 मोर्चा अध्यक्ष, 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष और 3 कार्यालय मंत्री शामिल किए गए हैं. संगठन में कई ऐसे नेताओं को भी स्थान मिला है जो हाल के वर्षों में अन्य दलों से भाजपा में आए हैं. इससे पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन में जिम्मेदारी सामाजिक प्रभाव, संगठनात्मक सक्रियता और Political उपयोगिता के आधार पर तय की जा रही है.

इसके अलावा 12 उपाध्यक्ष, 4 महामंत्री, और 9 मंत्री बाहर किए गए हैं. Political विश्लेषकों की मानें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भी नई कार्यकारिणी में विशेष महत्व दिया गया है. क्षेत्र के प्रभावशाली गुर्जर नेता नवाब सिंह नागर को पश्चिम क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पूर्व मंत्री सुरेश राणा को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. जाट, गुर्जर, त्यागी, और ब्राह्मण समुदायों के प्रभावशाली नेताओं को संगठन में जगह देकर भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया है.

विश्लेषक ने बताया कि Political दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले पश्चिमी यूपी में मोहित बेनिवाल और नवाब सिंह नागर जैसे नेताओं को मिली जिम्मेदारियां यह संकेत देती हैं कि पार्टी क्षेत्र में संगठनात्मक मजबूती के साथ सामाजिक आधार को और व्यापक बनाने की रणनीति पर काम कर रही है. पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में भी संगठनात्मक संतुलन साधा गया है.

गोरखपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी विनोद राय को सौंपी गई है, जबकि अंबेडकरनगर के नेता अवधेश द्विवेदी को अवध क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. एमएलसी धर्मेंद्र सिंह को एक बार फिर प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने को संगठन के अनुभवी चेहरों पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है. आगरा के रामप्रताप सिंह चौहान और विजय शिवहरे समेत कई नए नेताओं को संगठन में प्रमुख स्थान देकर भाजपा ने स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को भी स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठनात्मक सक्रियता और सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता दी जाएगी.

वरिष्ठ Political विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि भाजपा की नई प्रदेश टीम केवल संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की सामाजिक और Political रणनीति का खाका भी है. ओबीसी नेतृत्व को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह कार्यकारिणी भाजपा के उस व्यापक चुनावी समीकरण की झलक देती है, जिसके जरिए पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की जमीन तैयार करना चाहती है.

विकेटी/डीएससी