
कोलकाता, 4 मई . पश्चिम बंगाल की सबसे अहम और हाई-प्रोफाइल शहरी सीटों में गिनी जाने वाली बिधाननगर (साल्ट लेक) विधानसभा सीट पर इस बार बड़ा Political उलटफेर देखने को मिला है. भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और प्रसिद्ध ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता और मंत्री सुजीत बोस को करारी शिकस्त देते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है.
चुनाव आयोग के नतीजों के अनुसार, डॉ. शारद्वत मुखर्जी को कुल 97,979 वोट मिले और उन्होंने सुजीत बोस को 37,330 वोटों के बड़े अंतर से हराया. यह नतीजा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इस सीट पर पिछले डेढ़ दशक से टीएमसी का पूर्ण वर्चस्व रहा था.
बिधाननगर विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 116) का मौजूदा स्वरूप 2008 के परिसीमन के बाद 2011 में अस्तित्व में आया था. इससे पहले यह क्षेत्र ‘बेलगछिया पूर्व’ के नाम से जाना जाता था और लंबे समय तक सीपीआई (एम) के दिग्गज नेता सुभाष चक्रवर्ती का गढ़ रहा. 1977 से 2006 तक वाम मोर्चे का यहां एकछत्र राज था.
हालांकि, 2009 के उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की और तब से 2021 तक यह सीट लगातार टीएमसी के कब्जे में रही. सुजीत बोस ने 2009, 2011, 2016 और 2021 में लगातार चार बार जीत दर्ज कर इस सीट पर मजबूत पकड़ बनाई थी और 2026 में वे अपने पांचवें कार्यकाल की कोशिश में थे.
लेकिन इस बार भाजपा ने एक रणनीतिक दांव चलते हुए एक पेशेवर और प्रतिष्ठित डॉक्टर, डॉ. शारद्वत मुखर्जी को मैदान में उतारा.
यह सीट बारासात Lok Sabha क्षेत्र के अंतर्गत आती है और राज्य के शहरी मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है. यहां का सामाजिक ढांचा भी पूरे बंगाल से अलग है. जहां राज्य के कई क्षेत्रों में जातीय और धार्मिक समीकरण हावी रहते हैं, वहीं बिधाननगर में वर्ग आधारित राजनीति ज्यादा प्रभावी है.
साल्ट लेक जैसे उच्च शिक्षित और संपन्न इलाकों के साथ-साथ दत्ताबाद जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े वार्डों का मिश्रण इस सीट को और जटिल बनाता है. यहां अनुसूचित जाति और मध्यम वर्गीय मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम रही है.
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एबीएम
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