भाजपा ने ‘बंगाल फतह’ के लिए ऐसे की घेराबंदी, ‘सिंडिकेट और घुसपैठियों’ पर सवाल, 4 मई का इंतजार

कोलकाता, 29 अप्रैल . पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार एक ऐतिहासिक और बेहद आक्रामक सियासी लड़ाई का गवाह बना है. सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ चुनावी रण में उतरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस चुनाव में अपनी पूरी शीर्ष नेतृत्व की ताकत झोंक दी.

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन तक जिस तरह से भाजपा के दिग्गजों ने पश्चिम बंगाल के चप्पे-चप्पे पर रैलियों और रोड-शो का आयोजन किया, वह इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के लिए यह महज एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि एक वैचारिक और Political अस्मिता की लड़ाई थी.

​भाजपा के पूरे चुनावी अभियान का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य की सत्तारूढ़ Government को ‘सिंडिकेट राज’ और ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे पर घेरना रहा. भाजपा ने पश्चिम बंगाल फतह के लिए अपने सबसे बड़े चेहरों को लगातार चुनावी प्रचार के मैदान में उतारे रखा. जनसभाओं, विजय संकल्प रैली और रोड शो की संख्या यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा ने किस स्तर की ताकत लगाई है.

भाजपा के मुख्य रणनीतिकार और मौजूदा राजनीति के ‘चाणक्य’ माने जाने वाले अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में मोर्चा संभाले रखा. उन्होंने मार्च के अंत में ‘परिवर्तन यात्रा’ के शुभारंभ से लेकर 27 अप्रैल को प्रचार के अंतिम दिन तक धुआंधार रैलियां और जनसभाएं करते हुए Chief Minister ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस Government को घेरा.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10, 11, 13, 14, 15, 21, 22, 23, 24, 25, 26 और 27 अप्रैल को लगातार बैक-टू-बैक जनसभाएं, रोड-शो और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टीएमसी Government पर सीधा हमला बोला.

Prime Minister Narendra Modi ने पश्चिम बंगाल में ‘विजय संकल्प सभाओं’ के जरिए माहौल को पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में मोड़ने का प्रयास किया. 14 मार्च से लेकर 9, 12 (सिलीगुड़ी), 19, 23, 24, 26 और 27 अप्रैल (बैरकपुर) तक पीएम मोदी ने कई विशाल जनसभाओं को संबोधित किया, जहां उन्होंने सीधे तौर पर जनता से बदलाव की अपील की.

पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 2 मार्च, 24 और 25 मार्च के पश्चिम बंगाल प्रवास से शुरुआत की. इसके बाद 8, 9, 20, 22, 23 और 25 अप्रैल को उन्होंने लगातार बंगाल के विभिन्न हिस्सों में अपने कार्यक्रम किए.

उत्तर प्रदेश के Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव में लगभग 20 जनसभाएं और रैलियां कीं. उन्होंने हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाए. दूसरे और अंतिम चरण के मतदान से पहले 27 अप्रैल को प्रचार के आखिरी दिन उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए चार प्रमुख जनसभाओं और रोड-शो में हिस्सा लिया. ​इनके अलावा Union Minister जेपी नड्डा ने भी 19, 20, 25 और 26 अप्रैल को जनसभाएं कर पार्टी की स्थिति मजबूत की.

​पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के सभी बड़े नेताओं के भाषणों में एक समानता थी, वह यह थी कि राज्य में ‘सिंडिकेट राज’ को खत्म करने का संकल्प और ‘घुसपैठियों’ के कारण राज्य की बदलती डेमोग्राफी और सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता से उठाना.

28 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा टीएमसी Government के खिलाफ जारी किए गए आरोप पत्र से लेकर पीएम मोदी की विजय संकल्प सभाओं तक, भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पश्चिम बंगाल का असली और सर्वांगीण विकास इस तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार के नेटवर्क वाली टीएमसी Government को उखाड़ फेंकने के बाद ही संभव है.

दूसरी तरफ लोकतंत्र के उत्सव में बंगाल के मतदाताओं ने भी उत्साह से भाग लिया और रिकॉर्ड मतदान कर अगली Government के गठन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई. अब, लोगों की निगाहें 4 मई पर टिकी हैं, जब पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आएंगे. उसके बाद ही पता चलेगा कि बंगाल में किसकी Government बनेगी.

एबीएम