
New Delhi, 12 अगस्त . Samajwadi Party के सांसद राम गोपाल यादव ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, एयर इंडिया फ्लाइट में सुरक्षा संबंधी घटना, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और एफसीआरए बिल समेत कई मुद्दों पर Government को घेरा. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा से जुड़ा मामला अब केवल राष्ट्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ चुका है और यह मुद्दा आगे भी बना रहेगा.
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि Jharkhand में छात्रों की 95-98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं, लेकिन भाजपा हड़ताल खत्म नहीं होने दे रही है. भाजपा जानबूझकर Jharkhand का माहौल खराब कर रही है.
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने भी बड़ी संख्या में दान दिया था. इस मामले में असली दोषियों तक जांच पहुंचनी चाहिए. अभी केवल 7-8 छोटे लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा कि जब तक कथित तौर पर असली दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.
एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में गंभीर एयर टर्बुलेंस के कारण यात्रियों के घायल होने की घटना पर भी यादव ने इसे गंभीर मामला बताया. वहीं, पायलट के कथित डोप टेस्ट से जुड़े मामले पर उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर सुरक्षा चिंता है. उन्होंने दावा किया कि पायलट गांजे के नशे में था और उस समय अपनी सीट पर नहीं था. यादव ने कहा कि यह भगवान की कृपा थी कि सभी 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सुरक्षित बच गए.
जबरन वसूली के मुद्दे पर यादव ने कहा कि यह निश्चित रूप से गंभीर समस्या है, लेकिन उत्तर प्रदेश में Government जैसा कोई सिस्टम नहीं दिखाई देता. उन्होंने राज्य Government पर ही गुंडागर्दी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को पैर में गोली मारकर जीवनभर के लिए अपंग किया जा रहा है. अतीक अहमद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही कोई उन्हें अच्छा व्यक्ति न माने, लेकिन जिस तरह उनकी हत्या हुई, उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
एफसीआरए बिल पर यादव ने कहा कि इसे लाने की कोई जरूरत नहीं थी. उनका दावा है कि Jharkhand, Gujarat के डांग क्षेत्र और देश के अन्य आदिवासी इलाकों में मिशनरियों और एनजीओ ने शिक्षा व अन्य सुविधाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया है. उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों पर रोक लगाने से गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा और अन्य सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं.
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एएस
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