पूर्व सीएम राजे के कविता पाठ का भाजपाई ढूंढ रहे अर्थ


जयपुर (jaipur) . भारतीय जनता पार्टी की पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister) श्रीमती वसुंधरा राजे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मतभेद मनभेद की खबरें गायें बगाये आती रहती है उसी कड़ी में राजे ने आज विश्व कविता दिवस के अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता कदम मिलाकर चलना होगा कि कुछ पंक्तियां पढकर सोशल मीडिया (Media) में साया कर दी उनके द्वारा कविता की पंक्तियोंं का भारतीय जनता पार्टी में अपने अपने अर्थ निकाले जा रहे है.

पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister) वसुंधरा राजे ने कला विश्व कविता दिवस पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ की कुछ पंक्तियाँ पढक़र सोशल मीडिया (Media) पर साझा की. उन्होंने कविता दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए कविता पाठ की पंक्तियाँ पढक़र सुनाई. ‘’उजियारे में, अंधकार में, कल कछार में, बीच धार में. घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में. जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को दलना होगा. कदम मिलाकर चलना होगा. ये पहली बार है जब राजे ने इस अंदाज़ में कविता की पंक्तियों को खुद की आवाज़ देकर साझा किया है.

हालांकि इससे पहले वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की इस कविता का जि़क्र पूर्व में दिए बजट भाषण या चुनावी सभाओं में भी कर चुकीं हैं. ज्ञात रहे कि मुख्यमंत्री (Chief Minister) वसुंधरा राजे ने अभी पिछले दिनों ही देवदर्शन यात्रा की थी और उसमें उनके समर्थक विधायकों और संगठन पदाधिकारियों ने केन्द्रीय भाजपा नेतृत्व को संख्या बल का अहसास कराया था उसी श्रृंखला में राजे के द्वारा पढी गई पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता के अर्थ को निकाला जा रहा है.

2021-03-23
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