भाजपा महिला सांसदों का हमला, बोलीं- विपक्ष ने महिलाओं के साथ किया विश्वासघात

New Delhi, 17 अप्रैल . Lok Sabha में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खारिज होने के बाद भाजपा महिला सांसदों ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने इसे महिलाओं के साथ विश्वासघात बताया और कहा कि आगामी चुनावों में महिलाएं विपक्ष को इसका करारा जवाब देंगी.

Union Minister रक्षा खडसे ने कहा, “मुझे लगता है कि आज महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक फैसला होने वाला था, लेकिन सभी विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया. विपक्षी दल अक्सर महिलाओं के सम्मान और गरिमा की बात करते हैं, लेकिन आज इस विधेयक को पारित करके महिलाओं को उनके अधिकार देने का सही दिन था. हालांकि, विपक्ष ने ऐसा नहीं किया.”

BJP MP बांसुरी स्वराज ने कहा, “आज एक वादा पूरा करने का दिन था, लेकिन कांग्रेस पार्टी और पूरा इंडिया गठबंधन सिर्फ अपने Political हितों से प्रेरित थे. आज उन्होंने इस देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है. उन्होंने महिलाओं की पीठ में छुरा घोंपा है, और अब उन्हें देश की महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा.”

BJP MP कमलजीत सहरावत ने स्पष्ट किया कि 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ अभी भी लागू है. उन्होंने कहा, “इस विधेयक के तहत पहले जनगणना और परिसीमन का प्रावधान था. अब जब जनगणना और परिसीमन का समय आया तो इसमें समय लग रहा था. इसलिए Government ने सोचा कि 2029 तक महिलाओं को उनका उचित हिस्सा मिल जाना चाहिए और इसीलिए इस अधिनियम में संशोधन की जरूरत थी.”

BJP MP माया नारोलिया ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा, “आज कांग्रेस पार्टी ने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है और महिलाएं इसे कभी माफ नहीं करेंगी. महिलाएं गुस्से में हैं और उन्हें गहरा आघात पहुंचा है. जब चुनाव आएंगे तो महिलाएं उन्हें सबक सिखाएंगी.”

BJP MP सीमा द्विवेदी ने कहा, “आज यह विधेयक पारित नहीं हो सका और इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है. India के इतिहास और लोकतंत्र में जिस तरह विपक्ष ने महिलाओं को दबाया और उनके साथ विश्वासघात किया है, उसकी जितनी आलोचना की जाए कम है. आने वाले चुनावों में, चाहे 2027 में उत्तर प्रदेश में हों, पश्चिम बंगाल में या कहीं और, महिलाएं इसका करारा जवाब देंगी.”

भाजपा की राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह ने कहा, “विपक्ष ने आज जो किया है, उसे इस देश की जनता देख रही है, खासकर वे महिलाएं जो देश की आधी आबादी हैं. पिछले तीन दशकों से महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने की कोशिशें की जा रही हैं. आज भी वही हो रहा है. लेकिन मैं यह कहना चाहती हूं कि इस देश की महिलाएं अब जागरूक हो चुकी हैं.”

BJP MP पूनमबेन मादम ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि इस देश की महिलाएं, चाहे वे ग्रामीण इलाकों से हों या शहरी इलाकों से, पिछले 40 सालों से इस विधेयक और इस दिन का इंतजार कर रही हैं. वे सभी चाहती थीं कि विधानसभा और Lok Sabha में उनकी आवाज सुनी जाए और उसे मजबूती मिले.”

भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने कहा, “राजनीति तो चलती रहेगी, लेकिन जब पार्टी की सीमाओं से ऊपर उठकर समाज और महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आया, तो ऐसा लगा जैसे हर कोई जश्न मनाने के लिए तैयार है. हालांकि, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की राजनीति के चलते आज का दिन महिलाओं के अधिकारों के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुआ है. जहां हर कोई महिला सशक्तिकरण की बात करता है, वहीं यह एक बहुत बड़ा अवसर था और ऐसा लगता है कि वह अवसर महिलाओं से छीन लिया गया है. यह बेहद निराशाजनक है.”

भाजपा महिला सांसदों का एकमत रुख है कि विपक्ष ने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है. उन्होंने दावा किया कि महिलाएं अब जागरूक हो चुकी हैं और आने वाले चुनावों में विपक्ष को इसका जवाब जरूर देंगी. भाजपा का कहना है कि 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले से लागू है और Government महिलाओं को 2029 से ही उनका उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है.

एससीएच/डीकेपी