
New Delhi, 3 अगस्त . Lok Sabha में ‘Supreme Court (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ को Monday को ध्वनि मत से पारित किया गया.
Monday दोपहर में कुछ देर के लिए स्थगित होने के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई. हालांकि विपक्ष के सदस्यों का शोरशराबे वाला विरोध संसदीय कामकाज में बाधा डालता रहा.
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में यह विधेयक पेश किया. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने जोर-शोर से नारेबाजी की और जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान Police की कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग करते रहे.
कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी की बार-बार की अपीलों के बावजूद विरोध-प्रदर्शन जारी रहा. हालांकि, बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.
जब हंगामे के कम होने के कोई आसार नहीं दिखे, तो अध्यक्ष ने आखिरकार Lok Sabha की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी.
Supreme Court (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 का मकसद उस अध्यादेश की जगह लेना है, जिसे इस साल की शुरुआत में जारी किया गया था. इसका उद्देश्य न्यायपालिका पर बढ़ते काम के बोझ और लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए Supreme Court में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को बढ़ाना था.
प्रस्तावित कानून के तहत Supreme Court में जजों की मंजूर संख्या India के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 33 से बढ़ाकर 37 कर दी जाएगी, जिससे कोर्ट में जजों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी.
यह बिल ‘Supreme Court (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ की जगह लेने के लिए है, जिसे मई में जारी किया गया था. इस बीच, बार-बार हुए व्यवधानों के कारण कार्यवाही बाधित होने से पहले दिन की शुरुआत में विधायी कामकाज जारी रहा.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ पेश किया. इस बिल का मकसद बैंकर्स की किताबों से जुड़े सबूतों के कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना है, ताकि इसे आज के डिजिटल बैंकिंग तौर-तरीकों के अनुरूप बनाया जा सके. प्रस्तावित कानून का मकसद डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम (वित्तीय व्यवस्था) में हो रहे बदलावों से जुड़े या उनसे संबंधित मामलों को भी सुलझाना है.
एक और अहम विधायी घटनाक्रम में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने सदन में ‘इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल’ पेश किया.
प्रस्तावित कानून का एकेडमिक समुदाय के कुछ वर्गों और इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (आईएसआई) के छात्रों की ओर से पहले ही कड़ा विरोध किया गया है.
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एसएचके/पीएम
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