
मुजफ्फरपुर, 6 अगस्त . बिहार में सूक्ष्म और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य Government ने पहली बार ठोस कदम उठाए हैं. लघु उद्योग भारती बिहार के अध्यक्ष श्याम सुंदर भीमसरिया ने Thursday को कहा कि Government एक अलग निदेशालय बनाकर और उद्यमियों के लिए नई नीतियां तैयार करके इस क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
भीमसरिया ने से बातचीत में कहा, “बिहार Government ने पहली बार सूक्ष्म और लघु उद्योग की चिंता करने का काम किया है. अभी तक बिहार Government की जो नीतियां बनती थीं, वह पूरे उद्योग के लिए बनती थीं. जिसका अधिकांश लाभ मध्य और बड़े उद्योग के लोगों को मिलता था. सूक्ष्म और लघु उद्योग वाले इससे वंचित हो जाते थे.”
उन्होंने बताया कि इस बार Government ने एमएसएमई के लिए अलग से निदेशक की नियुक्ति की है. भीमसरिया ने कहा, “बिहार Government ने पहली बार एमएसएमई का एक अलग से डायरेक्टर बनाया है. जिसकी जिम्मेदारी इन उद्योगों को आगे ले जाने की है.”
अध्यक्ष के अनुसार, Government ने नीति बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. उन्होंने कहा, “इस दिशा में बिहार Government ने नीति बनाना शुरू कर दिया है. हम एमएसएमई डायरेक्टर के साथ और जो कार्यरत एसोसिएशन हैं, उनके साथ मिलकर एक-एक बिंदुओं पर सूक्ष्म रूप से विश्लेषण कर रहे हैं कि कैसे अधिक से अधिक उद्योगों को लाभ दे सकें.”
उन्होंने सब्सिडी को लेकर सूक्ष्म उद्योगों की दिक्कतें गिनाईं. भीमसरिया ने कहा, “सब्सिडी का मामला ही देख लीजिए. सूक्ष्म उद्योग वालों को सब्सिडी का बहुत ही कम लाभ मिल पाता है. उन्हें इसलिए लाभ नहीं मिल पाता क्योंकि वह पेपर की फॉर्मेलिटी पूरी नहीं कर पाते हैं. वास्तव में जो देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार देने वाला सेक्टर है, वह सूक्ष्म उद्योग हैं. इसलिए हमें इसे मजबूत करना होगा. किसी भी डिपार्टमेंट द्वारा उन्हें तंग और परेशान नहीं किया जाना चाहिए.”
बिहार Government के एक और बड़े फैसले की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि जमीन को लेकर क्रांतिकारी निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा, “जमीन को ध्यान में रखते हुए बिहार Government ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है. विधानसभा से इसे पारित भी करवा दिया गया है. अब तक उद्योगों की जमीन लीज होल्ड हुआ करती थीं, जिसके कारण उद्योगों को तरह-तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था. लेकिन अब ऐसी जमीनों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करना स्वीकार कर लिया गया है. विधानसभा से यह पारित हो गया है. अब जमीन का मालिकाना हक उद्यमी का होगा.”
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एससीएच/एबीएम
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