
मोतिहारी, 24 मई . भारत-नेपाल सीमा पर लंबे समय से चल रहे जाली नोटों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार के खिलाफ Sunday को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. आर्मी इंटेलिजेंस और बिहार विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की संयुक्त टीम ने गिरोह के मुख्य सरगना सुशील तिवारी उर्फ दया तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है. बताया जाता है कि वह लंबे समय से फरार था.
बताया जा रहा है कि आरोपी भारत, नेपाल तथा बांग्लादेश में जाली नोटों के नेटवर्क का संचालन कर रहा था. उसकी गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता मानी जा रही है. मोतिहारी के Police अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि दया तिवारी की गिरफ्तारी के लिए Police के साथ-साथ कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां लगातार काम कर रही थीं. उन्होंने इस गिरफ्तारी को बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि आरोपी को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जाएगी, जिससे उसके गिरोह के अन्य सदस्यों का पता चल सके.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सुशील तिवारी के खिलाफ भारत, नेपाल और बांग्लादेश में जाली नोट से जुड़े कई मामले दर्ज हैं. अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से सीमा पार संचालित जाली करेंसी गिरोह को बड़ा झटका लगा है. इसके खिलाफ हरैया और मेजरगंज थाना में मामला दर्ज है. Police के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सुशील तिवारी ने जाली नोट के कारोबार से जुड़े कई अहम जानकारी Police को दी हैं, जिनके आधार पर जांच एजेंसियां अब आगे की कार्रवाई में जुट गई हैं.
बता दें पिछले साल 31 जनवरी को Police ने एक नेपाली नागरिक समेत कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से करीब 25 लाख रुपये की नेपाली जाली मुद्रा और 18,500 रुपये की भारतीय जाली करेंसी बरामद की गई थी. इसके अलावा एक दर्जन मोबाइल फोन, पासपोर्ट, मोटरसाइकिल, जाली नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायन और उपकरण भी जब्त किए गए थे. इस कार्रवाई के बाद से ही सुशील तिवारी फरार था.
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एमएनपी/पीएम
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