बिहार: बीएयू सबौर का ‘मिशन आम गुठली’ शुरू, वेस्ट को वेल्थ में बदलने की पहल

भागलपुर, 6 जुलाई . बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर ने आम की गुठलियों को अपशिष्ट के बजाय मूल्यवान संसाधन में बदलने की दिशा में एक नई पहल की है. विश्वविद्यालय के नेचर क्लब और उद्यान (फसलोत्तर प्रबंधन) विभाग की ओर से Monday को ‘अपशिष्ट से समृद्धि, मिशन आम गुठली कार्यशाला’ का शुभारंभ किया गया.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीआर सिंह ने हरित ध्वज दिखाकर इस अभियान की शुरुआत की. इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि आम की गुठली कोई बेकार वस्तु नहीं, बल्कि एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है. यदि इसे कचरे में फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित और प्रसंस्कृत किया जाए तो इससे खाद्य, औद्योगिक तथा जैव-आधारित कई उच्च मूल्य के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि अपशिष्ट को संपदा में बदलना ही सतत विकास और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय का यह अभियान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ जोड़ने का प्रयास है. इससे न केवल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों, युवाओं और उद्यमियों के लिए नए आर्थिक अवसर भी विकसित होंगे.

कुलपति ने विश्वविद्यालय परिवार और भागलपुर जिले के लोगों से अपील की कि आम खाने के बाद गुठलियों को फेंकने के बजाय उन्हें अच्छी तरह साफ कर छाया में सुखाएं और अपने निकटतम संग्रह केंद्र पर जमा करें. उन्होंने बताया कि नेचर क्लब समय-समय पर इन संग्रह केंद्रों से गुठलियों का संग्रह करेगा. इसके बाद उनका वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन कर खाद्य, न्यूट्रास्यूटिकल, कॉस्मेटिक तथा अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे.

कार्यशाला में विश्वविद्यालय के डीन, विभिन्न निदेशक, बिहार कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य, नेचर क्लब के सदस्य, उद्यान (फसलोत्तर प्रबंधन) विभाग एवं फल प्रौद्योगिकी के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, संकाय सदस्य तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया. इस दौरान आम की गुठलियों के संग्रहण, वैज्ञानिक उपयोग, प्रसंस्करण और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा पर विस्तार से जानकारी दी गई.

कुलपति ने कहा कि यह अभियान केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सबौर नगर और भागलपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें. उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य अपशिष्ट को आय, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाकर समाज में सतत विकास की नई सोच को बढ़ावा देना है.

एमएनपी/डीकेपी