
चेन्नई, 18 जून . तमिलनाडु की राजनीति में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) के डीएमके-नीत सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) से अलग होने और Chief Minister सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके Government के करीब जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं.
पार्टी सूत्रों के अनुसार, एमडीएमके 27 जून को होने वाली अपनी जनरल काउंसिल बैठक में डीएमके गठबंधन से अलग होने का औपचारिक ऐलान कर सकती है. यदि ऐसा होता है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा Political पुनर्गठन माना जाएगा.
डीएमके के कई पूर्व सहयोगी दल जैसे के, आईयूएमएल, सीपीआई और सीपीएम पहले ही टीवीके Government को समर्थन दे चुके हैं. हालांकि एमडीएमके अब तक खुलकर Government के समर्थन में नहीं आ सकी, क्योंकि उसके दो विधायक डीएमके के चुनाव चिह्न ‘राइजिंग सन’ पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे.
पार्टी नेताओं का मानना है कि इस स्थिति में सबसे व्यावहारिक रास्ता यही है कि दोनों विधायक अपने पद से इस्तीफा दें, उपचुनाव लड़ें और दोबारा जीतने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन का समर्थन करें.
एमडीएमके प्रमुख वाइको और उनके बेटे, तिरुचिरापल्ली से सांसद दुरई वाइको, दोनों सार्वजनिक रूप से डीएमके के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने को लेकर खेद जता चुके हैं. हाल ही में दुरई वैको ने कहा था कि डीएमके के टिकट पर जीतने के कारण उनकी पार्टी टीवीके Government का समर्थन नहीं कर पा रही है, जो उनके लिए दुर्भाग्य की बात है.
Tuesday को लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुना ने चेन्नई स्थित वाइको के आवास पर उनसे मुलाकात की थी. इसके अगले दिन वाइको ने सचिवालय में Chief Minister विजय से मुलाकात की. हालांकि वाइको ने गठबंधन बदलने की खबरों को महज अटकल बताया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि Chief Minister के साथ करीब 45 मिनट चली बैठक में Political मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.
इसी बीच दुरई वाइको ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ हालिया अपराधों को लेकर टीवीके Government का बचाव भी किया. उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कानून-व्यवस्था बिगड़ने की बात कही जा रही थी. उनका कहना था कि यह Government के खिलाफ एक ‘नैरेटिव’ तैयार करने की कोशिश है.
उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है और ऐसे मामले डीएमके शासन के दौरान भी सामने आते रहे थे.
बता दें कि अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में एमडीएमके ने डीएमके के चुनाव चिह्न पर चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से दो सीटों पर जीत मिली थी. यदि पार्टी के दोनों विधायक इस्तीफा देते हैं, तो विधानसभा में रिक्त सीटों की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी. इनमें Chief Minister विजय के पद संभालने के बाद खाली हुई तिरुचिरापल्ली (पूर्व) सीट भी शामिल है.
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एएस
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