
गुवाहाटी, 6 जुलाई . असम के कानून मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने Monday को विधानसभा में घोषणा की कि डिब्रूगढ़ और बराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की बेंच स्थापित की जाएंगी. यह ऊपरी असम और राज्य के दक्षिणी हिस्से में न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
इस घोषणा से एक पुरानी मांग पूरी हो रही है, खासकर बराक घाटी से, जहां वकील, Political दल, नागरिक समाज संगठन और निवासी दशकों से गुवाहाटी हाईकोर्ट की एक स्थायी बेंच की मांग कर रहे थे.
कछार, श्रीभूमि और हैलाकांडी जिलों से मिलकर बनी बराक घाटी, गुवाहाटी से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित है. हाईकोर्ट की बेंच न होने के कारण मुकदमों से जुड़े लोगों और वकीलों को सुनवाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे काफी खर्च और देरी होती थी.
इसी तरह, डिब्रूगढ़ में प्रस्तावित बेंच से ऊपरी असम के जिलों के लोगों को फायदा होने की उम्मीद है क्योंकि इससे न्यायिक सेवाएं लोगों के करीब आएंगी और गुवाहाटी हाईकोर्ट की मुख्य सीट पर निर्भरता कम होगी.
प्रस्तावित बेंचों से न्याय तक पहुंच बेहतर होने, यात्रा का समय और मुकदमेबाजी का खर्च कम होने तथा मामलों का तेजी से निपटारा होने की उम्मीद है. इनसे न्यायिक बुनियादी ढांचे के मजबूत होने और दोनों क्षेत्रों में कानूनी व्यवस्था के समग्र विकास को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है.
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट के कामकाज का विकेंद्रीकरण करने से गुवाहाटी में मुख्य बेंच पर बोझ कम होगा और साथ ही दूर-दराज के जिलों के मामलों का अधिक कुशलता से निपटारा सुनिश्चित हो सकेगा.
बराक घाटी में बेंच की मांग को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई सार्वजनिक अभियान चलाए गए हैं, जिनमें बार एसोसिएशन और विभिन्न संगठनों ने राज्य Government से इस क्षेत्र में एक स्थायी न्यायिक बेंच स्थापित करने का बार-बार आग्रह किया है.
इस फैसले की घोषणा करते हुए, कानून मंत्री ने इन दो बेंचों की स्थापना के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई और न ही उनके अधिकार क्षेत्र और कामकाज के तरीके के बारे में कोई विवरण दिया.
गुवाहाटी हाईकोर्ट असम, नागालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के लिए साझा हाईकोर्ट है और वर्तमान में गुवाहाटी में अपनी मुख्य सीट से काम करता है, जबकि कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में पहले से ही स्थायी बेंच काम कर रही हैं.
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एएसएच/पीएम
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