डीईओ कट्ठीवाड़ा गबन मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 56 रिहायशी प्लॉट किए जब्त

Bhopal , 25 जून . Enforcement Directorate (ईडी) के इंदौर स्थित सब-जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत धार जिले में स्थित 56 रिहायशी प्लॉट को अस्थायी रूप से जब्त किया है.

ईडी की ओर से यह जब्ती Madhya Pradesh के अलीराजपुर जिले के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिस (बीईओ), कट्ठीवाड़ा, से 20.47 करोड़ रुपए के बिलों की धोखाधड़ी से मंजूरी और सरकारी फंड के गबन की चल रही जांच के सिलसिले में की गई है.

ईडी ने अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा Police स्टेशन में दर्ज First Information Report के आधार पर जांच शुरू की थी. यह First Information Report 2018-2023 के दौरान ब्लॉक एजुकेशन ऑफिस (बीईओ), कट्ठीवाड़ा, से 20.47 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले ट्रेजरी पेमेंट से संबंधित थी.

ईडी की जांच से पता चला कि कमल राठौर ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अलीराजपुर ट्रेजरी से सरकारी फंड का गबन किया. हेराफेरी किए गए फंड को उसके और उसके परिवार के सदस्यों द्वारा नियंत्रित और प्रबंधित विभिन्न बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, नकद निकाला गया और बाद में धार जिले के गंधवानी में कृषि भूमि खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया.

आगे की जांच से पता चला कि अपराध से प्राप्त पैसे से खरीदी गई कृषि भूमि को बाद में ‘श्री बालाजी धाम’ प्रोजेक्ट के तहत रिहायशी प्लॉट में विकसित किया गया. यह विकास संपत्ति के अवैध स्रोत को छिपाने और अवैध संपत्ति को वैध दिखाने के इरादे से किया गया था. श्रीबालाजी धाम के अस्थायी रूप से जब्त किए गए 56 रिहायशी प्लॉट की बाजार कीमत 6 करोड़ रुपए से ज्यादा है.

इससे पहले ईडी की ओर से पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत की गई तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए और बैंक खाते फ्रीज किए गए. जांच के दौरान आरोपी कमल राठौर को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल होने के कारण गिरफ्तार किया गया था.

इसके बाद आरोपियों की 4.43 करोड़ रुपए की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया गया था और बाद में 10 मार्च को इस जब्ती की पुष्टि कर दी गई. इसके अलावा, 29 सितंबर 2025 को इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में कमल राठौर और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दायर की गई. वहीं, ईडी की ओर से इस मामले से जुड़े आगे की जांच चल रही है.

डीके/डीकेपी